सोने और चांदी की कीमतें: अगर आप इस हफ्ते सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो ज़्यादा कीमत चुकाने के लिए तैयार रहें। नए हफ्ते की शुरुआत पूरे भारत में कीमती धातुओं की कीमतों में भारी उछाल के साथ हुई है। सोमवार, 27 अक्टूबर, 2025 तक, सोना और चांदी दोनों ही काफ़ी महंगे हो गए हैं, जो पिछले हफ्ते के अंत में देखी गई गिरावट के रुख़ से एक बड़ा उलटफेर है।
देश में सर्राफा दरों के सबसे विश्वसनीय स्रोत, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट (999 शुद्धता) सोने की कीमत बढ़कर ₹1,22,402 प्रति 10 ग्राम हो गई है। यह शुक्रवार शाम के बंद भाव से ₹884 की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। इसी तरह, ज़्यादा ख़रीदा जाने वाला 22 कैरेट सोना (916 शुद्धता) अब ₹810 की वृद्धि के साथ ₹1,12,120 प्रति 10 ग्राम हो गया है।
यह तेज़ी सिर्फ़ सोने तक ही सीमित नहीं रही। चाँदी की कीमत में भी ज़बरदस्त उछाल आया और इसकी कीमत ₹997 बढ़कर ₹1,48,030 प्रति किलोग्राम हो गई।
तथ्यों की जाँच और खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ:
स्रोत सत्यापित: उद्धृत दरें आधिकारिक तौर पर भारतीय बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा प्रदान की जाती हैं, जो भारतीय बाजार के लिए मानक-निर्धारक निकाय है।
सप्ताहांत और छुट्टियों के लिए स्पष्टीकरण: IBJA द्वारा सप्ताहांत (शनिवार और रविवार) और केंद्र सरकार की छुट्टियों पर नई दरें प्रकाशित न करना एक मानक प्रक्रिया है। “शुक्रवार शाम” की दर सोमवार के अपडेट से पहले प्रकाशित अंतिम मानक दर होती है।
अंतिम मूल्य को समझना: उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ये IBJA दरें आधार मूल्य हैं और इनमें वस्तु एवं सेवा कर (GST) या मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं। जब आप आभूषण खरीदते हैं, तो इन अतिरिक्त लागतों के कारण अंतिम बिल अधिक होगा।
शुक्रवार के रुझान पर एक नज़र
सोमवार की यह तेजी नरमी के दौर के बाद आई है। शुक्रवार, 24 अक्टूबर को, शाम के सत्र तक कीमतों में वास्तव में गिरावट आई थी। उदाहरण के लिए, 24 कैरेट सोने की कीमत सुबह ₹1,22,419 से शुक्रवार शाम तक ₹1,21,518 तक गिर गई थी, जिससे आज की तेजी बाजार पर नजर रखने वालों और संभावित खरीदारों के लिए और भी स्पष्ट हो गई।
संक्षेप में, सर्राफा बाजार ने सप्ताह की शुरुआत तेजी के साथ की है। निवेशकों और आभूषण खरीदारों को इन दैनिक उतार-चढ़ावों पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि वैश्विक आर्थिक कारक और मुद्रा की चाल घरेलू कीमतों को प्रभावित करती रहती है।