सिक्सलेन के लिए जमीन अधिग्रहण में किसान-मुआवजे को लेकर विवाद जारी

Saroj kanwar
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Shivpuri News: मुरैना में ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन रेट को लेकर विवाद है। प्रशासन जमीन के लिए बीघा 4 लाख रुपये देने को तैयार है, जबकि किसान 25 से 30 लाख रुपये तक का मुआवजा मांग रहे हैं। इसी वजह से 2152 किसानों ने अभी तक अपने खाते नंबर और मोबाइल नंबर नहीं दिए हैं, जिससे राजस्व विभाग को परेशानी हो रही है।

कलेक्टर अंकित अस्थाना ने अजनौधा गांव जाकर किसानों को इस सिक्सलेन प्रोजेक्ट के फायदे समझाए, लेकिन किसानों का कहना है कि जो जमीन के रेट चल रहे हैं, उतना मुआवजा मिलना चाहिए या फिर जमीन के बदले सिंचित और उपजाऊ जमीन दी जाए। अजनौधा के सरपंच देवेंद्र कंपाना का कहना है कि उनकी जमीन की कीमत 30 लाख रुपये बीघा है, इसलिए वे कम कीमत पर जमीन नहीं देंगे।

दिमनी के राघवेंद्र सिंह के खेत भी इस प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित किए जाएंगे। वहां जमीन की कीमत 10 लाख रुपये बीघा है, लेकिन प्रशासन 4 लाख रुपये देने की बात कह रहा है। किसान चाहते हैं कि कम से कम 8 लाख रुपये मिले।नाका के पुलेंद्र सिंह का कहना है कि यूपी और राजस्थान के किसानों को चार गुना मुआवजा मिल रहा है, इसलिए मुरैना के किसानों को भी ऐसा ही मुआवजा मिलना चाहिए। वहां जमीन का रेट 10 लाख रुपये बीघा है, लेकिन प्रशासन तीन लाख रुपये दे रहा है, जो गलत है।

मुरैना व बानमोर तहसील क्षेत्र के कुल 3352 किसानों की जमीन अधिग्रहण की जाएगी। फिलहाल 1200 किसानों ने बैंक और मोबाइल नंबर दिए हैं। बाकी 2152 किसानों को मुआवजा बढ़ाने की मांग पर मनाना बाकी है।

मप्र किसान सभा भी तीन बार कलेक्ट्रेट पर विरोध कर चुकी है और चार गुना मुआवजा देने की मांग कर रही है। लेकिन सरकार ने अभी तक इसे नहीं माना है।

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