सर्दी-खांसी के मौसम में चेतावनी – क्या आपने कभी सोचा है कि सर्दी-जुकाम होते ही आपकी आवाज़ अचानक भारी, कर्कश या बिल्कुल बेसुरी क्यों हो जाती है? ऐसा लगता है जैसे आप नहीं, कोई और बोल रहा है! हम इसे आमतौर पर “गले में खराश” कहते हैं, लेकिन यह वास्तव में आपके शरीर के अंदर चल रही एक बहुत ही दिलचस्प “वैज्ञानिक” प्रक्रिया का परिणाम है। आइए समझते हैं कि सर्दी-जुकाम हमारी आवाज़ पर ऐसा असर क्यों डालता है।
- असली खलनायक: स्वरयंत्रशोथ
जब आपको कोई वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण होता है, तो इसका असर सिर्फ़ नाक या गले तक ही सीमित नहीं रहता। यह सीधे उन नसों पर हमला करता है जो हमारी आवाज़ उत्पन्न करती हैं, जिन्हें स्वर रज्जु कहते हैं।
क्या होता है: ये स्वर रज्जु हमारे गले (स्वरयंत्र) में स्थित होती हैं। जब हम बोलते हैं, तो हवा के प्रवाह के कारण इनमें तेज़ी से कंपन होता है, जिससे ध्वनि उत्पन्न होती है।
रोग के प्रभाव: संक्रमण के कारण स्वर रज्जुओं में सूजन आ जाती है। चिकित्सकीय भाषा में इसे स्वरयंत्रशोथ कहते हैं।
परिणाम: सूजन इन स्वर रज्जुओं को और मोटा कर देती है। यह मोटापन उनके कंपन को धीमा कर देता है, ठीक वैसे ही जैसे गिटार का मोटा तार गहरी ध्वनि उत्पन्न करता है। कंपन के धीमे होने से आपकी आवाज़ गहरी, कर्कश या भारी लगने लगती है।
- दोहरा हमला: बलगम का खेल
सर्दी-जुकाम के दौरान बनने वाला गाढ़ा बलगम भी स्वर विकृति का एक प्रमुख कारण है।
यह आपकी आवाज़ को कैसे प्रभावित करता है: यह बलगम स्वर रज्जुओं पर एक पतली परत बना लेता है। यह परत उन्हें स्वतंत्र रूप से कंपन करने से रोकती है।
परिणाम: आपकी आवाज़ कर्कश, फटी हुई हो जाती है, और आपको बार-बार गला साफ़ करने की ज़रूरत महसूस होती है। कभी-कभी, सर्दी ठीक होने के बाद भी, बलगम बना रहता है, जिससे आपकी आवाज़ को सामान्य होने में कुछ समय लगता है।
- खाँसी: स्वर रज्जुओं का दुश्मन
जब हमें गले में खराश होती है, तो हम अक्सर एक गलती कर बैठते हैं—बार-बार खाँसना या ज़ोर-ज़ोर से गला साफ़ करना।
यह क्यों बुरा है: यह आदत स्वर रज्जुओं पर अत्यधिक दबाव डालती है और उन्हें और भी ज़्यादा तनाव देती है।
परिणाम: यह दबाव सूजन को और बढ़ा देता है, जिससे आपकी आवाज़ और भी थकी हुई, कमज़ोर या कर्कश लगने लगती है। इसलिए, ज़ोर-ज़ोर से खाँसने या गला साफ़ करने से बचें।
राहत के लिए 3 तथ्य-जाँचे हुए उपाय
गले की खराश को कम करने और अपनी आवाज़ को जल्दी ठीक करने के लिए, इन तीन चरणों का पालन करना सुनिश्चित करें:
पर्याप्त मात्रा में पानी और नमी:
सुझाव: दिन भर में खूब गुनगुना पानी पिएँ। इसके अलावा, कमरे में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें या गर्म भाप लें।
लाभ: इससे गले की सूजन कम होती है और जमा हुआ बलगम पतला होकर आसानी से निकल जाता है, जिससे स्वर रज्जुओं को आराम मिलता है।
अपने गले को पूरा आराम दें (स्वर विश्राम महत्वपूर्ण है):
सुझाव: यह बहुत ज़रूरी है। कुछ समय के लिए पूरी तरह से चुप रहने की कोशिश करें।
क्यों: याद रखें, धीरे से बोलने या फुसफुसाने से स्वर रज्जु उतनी ही थक सकती हैं जितनी चिल्लाने से। इसलिए, उन्हें पूरा आराम देना सबसे अच्छा है।
चेतावनी संकेत (डॉक्टर से कब मिलें):
डॉक्टर से कब मिलें: अगर 2 से 3 हफ़्तों के बाद भी आपकी आवाज़ में सुधार नहीं होता है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें।
कारण: यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है, जैसे स्वर रज्जु पर गांठें या एसिड रिफ्लक्स। ऐसे में, तुरंत किसी ईएनटी (कान, नाक और गला विशेषज्ञ) से सलाह लें।