वरिष्ठ नागरिकों के लिए बजट 2026-27: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनभोगियों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। सरकार ने बैंकों और डाकघरों में वरिष्ठ नागरिकों द्वारा जमा की गई सावधि जमा (एफडी) पर अर्जित ब्याज पर टीडीएस कटौती की सीमा को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख कर दिया है। यह निर्णय उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए बहुत लाभदायक होगा जो अपनी बचत एफडी, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) या बचत खातों में रखते हैं।
पहले, यदि किसी वरिष्ठ नागरिक को एक वर्ष में अपने बैंक खातों से कुल ब्याज ₹50,000 से अधिक प्राप्त होता था, तो बैंक अतिरिक्त राशि पर 10% की दर से टीडीएस काटता था। अब, यह सीमा बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी गई है। इसका अर्थ है कि यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की वार्षिक ब्याज आय ₹1 लाख से अधिक है, तो बैंक कोई टीडीएस नहीं काटेगा।
अधिक नकदी
इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि वरिष्ठ नागरिकों के पास हर महीने अधिक नकदी उपलब्ध होगी। कई बुजुर्ग लोग अपने दैनिक खर्चों, दवाओं और चिकित्सा उपचार के लिए बैंक ब्याज पर निर्भर रहते हैं।
मान लीजिए कि एक वरिष्ठ नागरिक सालाना 90,000 रुपये ब्याज कमाता है। पहले, 50,000 रुपये से अधिक की आय पर 40,000 रुपये पर टीडीएस काटा जाता था, जिससे उनकी मासिक आय कम हो जाती थी। अब, 1 लाख रुपये तक कोई कटौती नहीं होगी, इसलिए उन्हें बिना किसी कटौती के पूरे 90,000 रुपये मिलेंगे। इससे उनके मासिक बजट का प्रबंधन आसान हो जाएगा।
कागजी कार्रवाई से राहत
कई वरिष्ठ नागरिकों की कुल आय कर सीमा से कम होती है, फिर भी टीडीएस कटौती के कारण उन्हें अपनी आय विवरण (आईटीआर) दाखिल करनी पड़ती थी ताकि उन्हें अपना पैसा वापस मिल सके। यह प्रक्रिया उनके लिए थकाऊ और मुश्किल साबित होती थी।
नई प्रणाली के साथ, उन्हें अब बार-बार फॉर्म 15H जमा करने या रिफंड के लिए इंतजार करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे उनका समय और मेहनत दोनों बचेगी।
यह पूर्ण कर छूट नहीं है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह निर्णय केवल टीडीएस सीमा से संबंधित है, पूर्ण कर माफी से नहीं। आयकर अधिनियम की धारा 80टीटीबी के तहत, वरिष्ठ नागरिक ब्याज आय पर ₹50,000 तक की छूट के पात्र हैं, और इस सीमा में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
यदि किसी बुजुर्ग व्यक्ति की कुल आय (ब्याज और अन्य स्रोतों से) उनके कर स्लैब के अनुसार कर योग्य है, तो उन्हें अपना आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करना होगा और नियमों के अनुसार कर का भुगतान करना होगा। भले ही बैंक टीडीएस न काटे, अंतिम कर देयता व्यक्ति की ही रहेगी।