श्रावणी उपाकर्म पर ऋषि-मुनियों का पूजन और जनेऊ परिवर्तन

Saroj kanwar
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Bina News: बीना में शनिवार को श्रावण पूर्णिमा पर जनेऊधारी ब्राह्मणों ने मां मोतीचूर नदी के तट पर श्रावणी उपाकर्म का धार्मिक अनुष्ठान किया। इस दौरान सूर्य और ऋषियों का पूजन किया गया और यज्ञोपवीत (जनेऊ) का परिवर्तन किया गया। यह संस्कार आत्म-शुद्धि, पापों के प्रायश्चित और अच्छे कर्मों के संकल्प का प्रतीक माना जाता है।

अनुष्ठान के दौरान पं. कौशल किशोर महाराज ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म को यज्ञोपवीत परिवर्तन संस्कार भी कहा जाता है। यह ब्राह्मणों के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन होता है, जब वे अपना जनेऊ बदलते हैं और ऋषि-मुनियों का पूजन कर उनसे ज्ञान प्राप्ति की कामना करते हैं।

इस दिन व्यक्ति अपने जाने-अनजाने में किए पापों का प्रायश्चित करता है और भविष्य में सदाचार, हिंसा से बचाव तथा इंद्रियों पर नियंत्रण रखने का संकल्प लेता है। अनुष्ठान में पंचगव्य का सेवन कर शरीर की शुद्धि भी की जाती है।

इस कार्यक्रम में बबलू व्यास, विनोद तिवारी, बृज बिहारी देवरिया, अंकित तिवारी, अनुज व्यास, संदीप कटारे, दीनदयाल तिवारी और राकेश पाराशर समेत कई लोग शामिल हुए।

श्रावणी उपाकर्म का सामाजिक और धार्मिक महत्व बहुत गहरा होता है, जो ब्राह्मणों के जीवन में नए संकल्प और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

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