प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0: घर का मालिक होना हर व्यक्ति का सबसे बड़ा सपना होता है। विशेषकर शहरी क्षेत्रों में, बढ़ती जनसंख्या, महंगे आवास और उच्च ब्याज दरों के कारण, यह सपना लाखों परिवारों के लिए पहुंच से बाहर रह जाता है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए, केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 शुरू की है, जिसका उद्देश्य शहरी गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास प्रदान करना है।
योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त, 2023 को इस नई आवास योजना की घोषणा की। इस योजना का उद्देश्य देश के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लगभग एक करोड़ परिवारों को आवास सहायता प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि स्थायी घर न केवल जीवन स्तर में सुधार लाता है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और आत्मसम्मान को भी मजबूत करता है।
इस योजना से किन परिवारों को लाभ मिलेगा?
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 का लाभ केवल उन परिवारों को मिलेगा जिनके पास देश के किसी भी हिस्से में स्थायी घर नहीं है। लाभार्थियों को आय के आधार पर तीन समूहों में वर्गीकृत किया गया है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) में वे परिवार शामिल हैं जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये तक है। तीन से छह लाख रुपये की आय वाले परिवार निम्न आय वर्ग (एलआईजी) में आते हैं, जबकि छह से नौ लाख रुपये की आय वाले परिवार मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) में शामिल हैं।
योजना का कार्यान्वयन चार घटकों के माध्यम से होगा
सरकार इस योजना को चार अलग-अलग घटकों के माध्यम से लागू करने की तैयारी कर रही है। ये घटक घर निर्माण, घर खरीद, किराये के आवास और वित्तीय सहायता जैसे विकल्प प्रदान करेंगे, ताकि समाज के हर वर्ग की जरूरतों के अनुसार समाधान उपलब्ध हो सकें। मुख्य ध्यान उन परिवारों पर होगा जो अब तक शहरी आवास योजनाओं से वंचित रहे हैं।
ब्याज सब्सिडी से गृह ऋण सस्ते होंगे
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ब्याज सब्सिडी योजना है। इसके तहत, 35 लाख रुपये तक की कीमत वाले घर के लिए 25 लाख रुपये तक का गृह ऋण लिया जा सकता है। इस ऋण के पहले 8 लाख रुपये पर 12 वर्षों की अवधि के लिए चार प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस सहायता के माध्यम से, पात्र लाभार्थियों को लगभग एक लाख 80 हजार रुपये का कुल लाभ मिलेगा, जिससे उनकी EMI का बोझ काफी कम हो जाएगा।
बैंकों से ऋण लेना आसान हो जाएगा।
सरकार ने ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणियों के लिए क्रेडिट रिस्क गारंटी फंड ट्रस्ट की राशि भी बढ़ा दी है। इसे एक हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर तीन हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे बैंकों और आवास वित्त कंपनियों के लिए जोखिम कम होगा, जिससे वे कम ब्याज दरों पर आसानी से ऋण प्रदान कर सकेंगे।