रेलवे ट्रैक पर क्यों बिछाई जाती है गिट्टिया? यहां बालू और मिट्टी क्यों नहीं बिछाया जाता, जानें कारण 

Saroj kanwar
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Railway track: आप सभी ने ट्रेन का सफर जरूर किया होगा। ट्रेन का सफर करते समय अक्सर हमारे ध्यान ट्रेन के पटरियों पर जाती है जहां गिट्टी बिछाया जाता है। अक्सर आपके दिमाग में यह सवाल आता होगा कि यहां गिट्टीया ही क्यों बिछाई जाती है? यहां बालू और मिट्टी क्यों नहीं बिछाया जाता? तो आईए जानते हैं इसके पीछे का कारण…

 रेल की पटरी के नीचे कंक्रीट के बने प्लेट होते हैं इन्हें स्लीपर भी कहा जाता है। इन स्लीपर के नीचे पत्थर होता है, जिसे ब्लास्ट कहते हैं और नीचे अलग-अलग तरह की दो लेयर में मिट्टी भी होती है।

 इन सब के नीचे नॉर्मल जमीन होती है। रेलवे ट्रैक साधारण जमीन से थोड़ी ऊंचाई पर होते हैं और पटरी के नीचे कंक्रीट के बने स्लीपर, फिर पत्थर और इसके नीचे मिट्टी रहती है। इन चीजों की वजह से ट्रैक साधारण जमीन से थोड़ा ऊपर बनाया जाता है।

 रेलवे ट्रैक पर जो गिट्टी बिछाई जाती है वह थोड़ी अलग तरह की होती है। इसके जगह पर अगर यहां गोल पत्थर बिछाया जाता है तो वह फिसलने लगेगा। यह निकले होते हैं जो की फिसलते नहीं है।

 जब भी ट्रेन पटरी पर से गुजरता है तो आसानी से यह ट्रेन का भार संभाल लेते हैं। आपको बता दे एक ट्रेन का भार 10 लाख किलो तक होता है और इस वजन को सिर्फ पटरी नहीं संभाल सकती है। इतना भारी वजन संभालने के लिए लोहे के बने ट्रैक के साथ कंक्रीट से बने स्लीपर और पत्थर भी मदद करते हैं। बता दे की सबसे ज्यादा वजन इन पत्थरों का ही होता है यही वजह है कि कंक्रीट से बने स्लिपर अपनी जगह से हिलते नहीं है। आपको बता दे कि इसी कारण से रेलवे ट्रैक पर कंक्रीट बिछाया जाता है। मिट्टी या बालू बिछाने से ट्रेन सफर के समय फिसल सकती है।

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