राजस्थान बजट 2026 – जयपुर राज्य का पहला बजट कब पेश किया गया था? इतिहास चौंकाने वाला है।

Saroj kanwar
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राजस्थान बजट 2026 अपडेट: राजस्थान सरकार आज अपना पूर्ण बजट पेश करने जा रही है, जिससे समाज के सभी वर्गों को भारी उम्मीदें हैं। राज्य की उपमुख्यमंत्री दिया कुमार विधानसभा में लगातार तीसरी बार पूर्ण बजट पेश करेंगी। किसान, गरीब, मजदूर, शिक्षाविद और व्यवसायी सभी राज्य सरकार के बजट से उम्मीद कर रहे हैं कि यह बजट सरकारी खजाने को खोलेगा।

ऐसे में हर कोई बजट से जुड़ी रोचक जानकारियां जुटाने के लिए उत्सुक है। क्या आप जानते हैं कि जयपुर राज्य का पहला बजट कब तैयार और पेश किया गया था? दरअसल, लगभग 1500 गांवों और 11 निजामतों वाले तत्कालीन जयपुर राज्य के अंतर्गत वित्त मंत्रालय की स्थापना के साथ ही 1923 में वार्षिक बजट तैयार करने का कार्य शुरू हुआ था।

उस समय, ब्रिटिश शासन के तहत सवाई मानसिंह कम उम्र में ही राजा बन गए थे। परिणामस्वरूप, बजट प्रत्येक वर्ष मार्च से पहले तैयार किया जाता था। जयपुर राज्य का पहला व्यवस्थित बजट 1924 में तैयार किया गया था।

पहला बजट कब तैयार हुआ था?
जयपुर राज्य पर काफी चर्चा हुई है। जयपुर राज्य का पहला बजट 1924 में तैयार किया गया था। 1880 में सवाई राम सिंह की मृत्यु के समय, राज्य की वार्षिक आय ₹50 लाख थी। 1907 और 1908 की प्रशासनिक रिपोर्टों में राजस्व ₹6,820,773 और व्यय ₹6,400,000 दिखाया गया है।
इसके अतिरिक्त, विभागों के बजाय राजकोष में नकदी रखी जाने लगी। वर्ष 1923-24 की वास्तविक आय ₹1,362,294 थी। कृषि राजस्व को जयपुर राज्य की आय का प्राथमिक स्रोत माना जाता था।
जयपुर राज्य की अपनी टकसाल थी, जहाँ चाँदी के सिक्के ढाले जाते थे। रियासत काल में सचिवालय, विधान सभा, मायो और सवाई मानसिंह अस्पताल, साथ ही चांदपोल स्थित महिला अस्पताल की स्थापना हुई थी। उस समय सेना के खर्चों का भी ध्यान रखा जाता था।

पशु कानून में लगाए गए दंड
सर मिर्ज़ा इस्माइल ने बिरला पोद्दारों और अन्य व्यापारियों को अनेक कारखाने खोलने के लिए प्रोत्साहित किया। एक रिपोर्ट के अनुसार, 1948 में 300 कारखाने थे। 1946 में पशु नियंत्रण अधिनियम लागू किया गया, जिसके तहत 10 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता था। व्यवसायों, बैलगाड़ियों और हाथगाड़ियों पर भी कर लगाए गए। 1953 में मकान कर और सीमा शुल्क लागू होने पर एक बड़ा जन आंदोलन शुरू हुआ।

अनाज पर कर लगते ही किसान सड़कों पर उतर आए।
अनाज पर कर लगाने का प्रावधान किए जाने पर एक चौंकाने वाली घटना घटी। 1927 में, जब विशेष विभाग के प्रमुख अमरनाथ अटल ने अनाज पर कर लगाया, तो जनता सड़कों पर उतरने लगी। जयपुर की जागीरें अयोध्या, काशी और अफगानिस्तान तक फैली हुई थीं। 1925 में जगमोहन नाथ रैना प्रभारी थे। उस समय राज्य में 1,118 विद्यालय थे जिनका बजट 12 लाख रुपये था।

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