रक्षाबंधन प्यार, सुरक्षा और आत्मा की पवित्रता का त्योहार

Saroj kanwar
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Chhatarpur News: रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई और बहन के रिश्ते का एक गहरा वादा है। पहले समय में ब्राह्मण परिवारों में जाकर सभी सदस्यों को प्रतिज्ञा का धागा बांधते थे, जिसे मौली कहा जाता था। यह धागा सही कर्म, संस्कार और आचरण का संकेत होता था। समय के साथ बदलते जीवन में अब बहनें ही अपने भाइयों को यह धागा बांधती हैं, जो भाई-बहन के प्यार और सुरक्षा का प्रतीक बन गया है।

\रक्षाबंधन’ शब्द का अर्थ है ‘रक्षा’ और ‘बंधन’। राखी केवल कलाई पर बांधने वाला धागा नहीं, बल्कि आत्मा से आत्मा का वादा है कि हम जीवन में पवित्रता, मर्यादा और बेहतर रिश्तों को बनाए रखेंगे। राखी बांधना एक प्रतिज्ञा है कि हम अपने आचरण को सुधारेंगे और जीवन को अंदर से संवारेंगे।

राखी बांधने से पहले बहन जब भाई के माथे पर तिलक लगाती है, तो वह उसकी आत्मा की बुराइयों से रक्षा का संकेत देती है। तिलक लगाते समय यह याद रखना चाहिए कि हम सब आत्मा हैं और एक-दूसरे के लिए सम्मान, प्यार और सुरक्षा का भाव रखना चाहिए। यह तिलक सात संस्कारों पवित्रता, शांति, शक्ति, खुशी, प्यार, ज्ञान और आनंद—का प्रतीक है, जो जीवन में धर्म और जिम्मेदारी का पालन करने के लिए जरूरी हैं।इस प्रकार राखी केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भाई की आत्मा पर मर्यादा का तिलक है।

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