मेहरानगढ़ किले से जुड़ा रक्षाबंधन का अनूठा किस्सा, हुमायूं ने रखी राखी की लाज, रानी कर्णावती के लिए किया युद्ध

Saroj kanwar
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Raksha Bandhan 2025 : 9 अगस्त को रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाएगा। यह त्यौहार बेहद ही खास होता है।इस दिन बहन अपने भाई को राखी बांधती है और भाई के लंबे उम्र की दुआ करती है। रक्षाबंधन का एक किस्सा मेहरानगढ़ किले से भी जुड़ा हुआ है।

रक्षाबंधन की कहानी राजस्थान की रानी कर्णावती और मुगल बादशाह हुमायूं से जुड़ी हुई है। यह कहानी भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के वचन का प्रतीक है, जो रक्षाबंधन के त्योहार के पीछे के इतिहास और महत्व को दर्शाती है।

रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी

रानी कर्णावती मेवाड़ की एक शक्तिशाली और साहसी रानी थीं। उन्होंने अपने राज्य की जिम्मेदारी संभाली और अपने लोगों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया। जब गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर हमला किया, तो रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजकर मदद की गुहार लगाई।

हुमायूं ने की थी मदद

हुमायूं ने राखी का मान रखते हुए अपनी बहन समान रानी कर्णावती की रक्षा के लिए चित्तौड़ की ओर कूच किया। हालांकि, जब तक वह पहुंचे, रानी कर्णावती ने जौहर कर लिया था। इसके बावजूद, हुमायूं ने बहादुर शाह को हराकर चित्तौड़ को अपने कब्जे में ले लिया और रानी कर्णावती के पुत्रों को सौंप दिया।

रक्षाबंधन का महत्व

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के वचन का प्रतीक है। यह त्योहार हमें अपने परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों की याद दिलाता है। रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी रक्षाबंधन के त्योहार के पीछे के इतिहास और महत्व को दर्शाती है।

रक्षाबंधन की कहानी राजस्थान की रानी कर्णावती और मुगल बादशाह हुमायूं से जुड़ी हुई है। यह कहानी भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के वचन का प्रतीक है, जो रक्षाबंधन के त्योहार के पीछे के इतिहास और महत्व को दर्शाती है। इस त्योहार के माध्यम से हम अपने परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने का प्रयास करते हैं .

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