मां विंध्यवासिनी के आशीर्वाद से जुड़ा दुर्गानगर गांव, आस्था और संघर्ष की अनोखी कहानी

Saroj kanwar
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Tikamgarh News: जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर बल्देवगढ़ के पास बसा दुर्गानगर गांव अपनी धार्मिक पहचान के लिए जाना जाता है। गांव का नाम दुर्गा स्वरूपा मां विंध्यवासिनी के नाम पर रखा गया है। ऊँची पहाड़ी पर स्थित विंध्यवासिनी मंदिर यहां की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यही कारण है कि हर परिवार खुद को मातारानी से जुड़ा मानता है।

गांव की आबादी करीब 3500 है और यहां झिनगुवां व कछयांत जैसे छोटे मजरे भी शामिल हैं। अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर हैं। गेहूं, चना, सरसों, सोयाबीन और उड़द यहां की मुख्य फसलें हैं। हर धार्मिक आयोजन पर गांव के परिवार मंदिर में अन्नदान करना अपनी परंपरा मानते हैं। मंदिर से जुड़ी एक गुफा भी है, जिसे प्राचीन समय में शेर की गुफा कहा जाता था।

ग्रामीण बताते हैं कि कुछ परिवारों का एक सदस्य रोज़ाना मंदिर दर्शन के लिए पहुंचता है। यानी साल के 365 दिन मां के दरबार में पूजा-अर्चना का क्रम नहीं रुकता। मंदिर समिति की योजना है कि जल्द ही मंदिर परिसर में नियमित भंडारे की शुरुआत की जाएगी, जिसके लिए 30 एकड़ भूमि उपलब्ध है।

हालाँकि धार्मिक पहचान के बावजूद दुर्गानगर विकास की दौड़ में पीछे है। सड़क, नाली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएँ अभी पर्याप्त नहीं हैं। रोजगार के अवसर न होने के कारण युवाओं को पलायन करना पड़ता है। साक्षरता दर लगभग 80 प्रतिशत है, लेकिन शिक्षा पूरी करने के बाद भी रोज़गार की तलाश में अधिकांश लोग बाहर चले जाते हैं।

दुर्गानगर गांव आज भले ही कठिनाइयों से जूझ रहा हो, लेकिन मां विंध्यवासिनी में अटूट आस्था और सामूहिक परंपराएँ इसे एक अलग पहचान देती हैं।

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