मप्र में आदिवासियों की भैंसें बेचने का मामला: 5 एवीएफओ निलंबित, दूसरे जिलों में भेजा

Saroj kanwar
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MP News: मप्र में मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के तहत सहरिया आदिवासियों को दो-दो भैंसें दी गई थीं। लेकिन मुरैना और शिवपुरी जिले में दबंगों ने आदिवासियों की भैंसों को अपने कब्जे में लेकर उन्हें बेच दिया तो कुछ भैंसें दबंगों के बाड़े में बंधीं मिलीं। इस मामले में पशुपालन डेयरी विभाग भोपाल ने कार्रवाई की है। जांच में 5 सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (एवीएफओ) दोषी पाए गए हैं। जिन्हें निलंबित कर दूसरे जिलों में स्थानांतरित किया गया है।

25 जून 2025 को मामला सामने आने के बाद कलेक्टर और प्रदेश प्रशासन सकते में आ गया था। कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी के निर्देश पर शिवपुरी जिले में भैंसों की पड़ताल की गई। एसडीएम पोहरी मोतीलाल अहिरवार की निगरानी में हुई जांच में टीम ने भैंसों की चोरी होना सही पाया। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी कलेक्टर को दी गई। कलेक्टर ने जांच रिपोर्ट का प्रतिवेदन भेजकर स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदान योजना के तहत आदिवासियों को भैंसें खरीदने के लिए रकम जारी की गई। जिसकी मॉनिटरिंग में पशु चिकित्सा विभाग के वेटरनरी डॉक्टरों ने लापरवाही बरती। न तो उन्होंने इस मामले में कोई क्रॉस चेक किया और न ही मौके पर जाकर कोई पड़ताल की। इसे जिला प्रशासन ने लापरवाही और दोष पूर्ण माना और इसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर पशुपालन विभाग को भोपाल भेजी। जिस पर कार्रवाई कर विभाग के संचालक डॉ. पीएस पटेल ने पांचों दोषी सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी को निलंबित करने की कार्रवाई की।

125 आदिवासियों को दी थीं भैंसें

मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के तहत शिवपुरी और मुरैना जिले के 125 सहरिया आदिवासियों को दो-दो भैंसें दी गई थीं। लेकिन दैनिक भास्कर ने जब पड़ताल की तो सामने आया कि जिन सहरिया आदिवासियों के नाम भैंसें स्वीकृत हुई हैं, वे गांव के दबंगों के बाड़े में बंधी हुई हैं तो कई दबंग भैंसों को अपने कब्जे में लेकर बेच चुके हैं। जबकि आदिवासियों को न तो दूध पीने को मिला और न वे दूध बेचकर मुनाफा कमा सके।

यह 5 एवीएफओ हुए निलंबित

एलआर शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर, वेटरनरी शिवपुरी ने बताया कि इस मामले की जांच रिपोर्ट में जो दोषी है उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव भोपाल भेजा था, जिसमें 5 एवीएफओ को निलंबित किया गया है।

1 – राजू केवट, सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी बडोदी को अशोकनगर भेजा।

2 – पंजाब सिंह पाल पशु चिकित्सा अधिकारी सतनवाड़ा, तत्कालीन पशु चिकित्सा अधिकारी गंगोरा, को श्योपुर भेजा।

3 – साहूकार सिंह यादव, पशु चिकित्सा अधिकारी गोपालपुर को गुना भेजा।

4 – एएल अहिरवार, सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी गोपालपुर को मुरैना भेजा।

5 – धनंजय अटल, सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी बेराड को ग्वालियर भेजा।

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