मध्यप्रदेश के इस जिले में ब्लॉक प्रिंटिंग से बदल रही महिलाओं की जिंदगी, हो रही हजारों की कमाई

Saroj kanwar
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प्रशिक्षण में महिलाओं को सिंगल-डबल बेडशीट, सलवार सूट, साड़ी, दुपट्टा और कुशन कवर पर आधुनिक ब्लॉक प्रिंटिंग के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक मशीन से लहंगा, प्लाजो और फ्रॉक सिलाई सिखाई गई। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने इंदौर से कच्चा माल लाकर स्थानीय बाजार और मेलों में अपने उत्पाद बेचना शुरू कर दिया है।

एक सिंगल बेडशीट की लागत 300 रुपए आती है, जिसे 750 से 1250 रुपए तक बेचा जा रहा है, जिससे हर शीट पर 450 रुपए तक का मुनाफा हो रहा है। महिलाओं को हर माह 4 से 5 हजार रुपए तक की कमाई होने लगी है।विकास खंड प्रबंधक अंकुर सोनी और जिला प्रबंधक शैलेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि यह मॉडल अब दूसरे गांवों तक भी फैलाया जाएगा।

अगले चरण में 10 और समूहों को जोड़ा जाएगा। कौशल उन्नयन अधिकारी अरविंद चंदेल के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को “लखपति दीदी” बनाना है, ताकि वे आत्मनिर्भर होकर समाज में अपनी पहचान बना सकें।

MP News: मध्यप्रदेश के दमोह जिले के पथरिया ब्लॉक में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सराहनीय पहल हो रही है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और नाबार्ड के सहयोग से रानी लक्ष्मीबाई संकुल संगठन ने 30 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें 15 महिला समूहों की 30 दीदियों को ब्लॉक प्रिंटिंग और फैशन डिजाइनिंग की ट्रेनिंग दी गई।

MP News: मध्यप्रदेश के दमोह जिले के पथरिया ब्लॉक में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सराहनीय पहल हो रही है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और नाबार्ड के सहयोग से रानी लक्ष्मीबाई संकुल संगठन ने 30 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें 15 महिला समूहों की 30 दीदियों को ब्लॉक प्रिंटिंग और फैशन डिजाइनिंग की ट्रेनिंग दी गई।

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