ऐसा हमेशा नहीं होता कि एसी या रेफ्रिजरेटर के इस्तेमाल में बढ़ोतरी होने पर ही बिजली का बिल अचानक बढ़ जाता है। दरअसल, दैनिक जीवन में कुछ छोटी-छोटी आदतों और तरीकों को अपनाकर महीने के अंत में बिजली के खर्च को नियंत्रण में रखा जा सकता है। अनजाने में की गई कुछ गलतियों के कारण बिजली बर्बाद होती है, जिसका असर जेब पर पड़ता है।
कई घरों में देखा जाता है कि मोबाइल फोन चार्ज करने के बाद चार्जर निकालने के बाद भी स्विच बंद नहीं किया जाता। इस छोटी सी लापरवाही से स्टैंडबाय मोड में बिजली की खपत बढ़ जाती है। अगर यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहे, तो अनावश्यक रूप से अतिरिक्त यूनिट बिजली की खपत होती है, जिससे बिजली के बिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
घर की रोशनी में साधारण बल्बों की जगह एलईडी लैंप का इस्तेमाल करके आप बिजली बचा सकते हैं। साधारण बल्बों में फिलामेंट होने के कारण बिजली की बर्बादी अधिक होती है। वहीं, एलईडी लैंप में आधुनिक सर्किट तकनीक का इस्तेमाल होता है, इसलिए उतनी ही रोशनी के लिए बहुत कम बिजली की खपत होती है।
इलेक्ट्रिशियन तपन दास ने कहा कि एसी का इस्तेमाल करते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है। एसी को बार-बार चालू और बंद करने से बिजली की खपत बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एसी का तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने से न केवल आराम मिलता है बल्कि बिजली की बचत भी होती है।
रेफ्रिजरेटर का उपयोग करते समय सावधानी बरतनी भी आवश्यक है। दिन में कम से कम एक घंटे के लिए रेफ्रिजरेटर को बंद रखने से बिजली की खपत कम हो सकती है। चूंकि इस दौरान रेफ्रिजरेटर के अंदर ठंडक बनी रहती है, इसलिए भोजन के खराब होने की कोई संभावना नहीं होती, बल्कि उपकरण को आराम मिलता है।
कुल मिलाकर, बिजली बचाने के लिए बड़े बदलावों की कोई आवश्यकता नहीं है। थोड़ी सी जागरूकता और दैनिक जीवन की आदतों में बदलाव लाकर बिजली की बर्बादी को कम किया जा सकता है। इससे न केवल महीने के अंत में बिल कम आएगा, बल्कि बिजली बचाकर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकेगी।