बजट 2026: सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसे बचत और निवेश का सबसे विश्वसनीय साधन माना जाता है। 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम की कीमत अब 1.5 लाख रुपये से 1.6 लाख रुपये के बीच है। परिणामस्वरूप, लोग केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर सरकार की ओर उत्सुकता से देख रहे हैं। सोने के उद्योग से जुड़े लोग बजट में ऐसे बदलाव चाहते हैं जिससे घरेलू बचत में जमा सोना अर्थव्यवस्था में आए, आभूषण सस्ते हों और निर्यात को बढ़ावा मिले।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत लगभग 5,000 डॉलर और चांदी की कीमत लगभग 100 डॉलर के आसपास है। सोने की कीमतों में यह वृद्धि वैश्विक तनाव, ग्रीनलैंड विवाद और रुपये के कमजोर होने के कारण है। विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में कर नियमों को सरल बनाना, डिजिटल सोने को बढ़ावा देना और आभूषणों पर जीएसटी कम करना आवश्यक है।
श्रृंगार हाउस ऑफ मंगलसूत्र लिमिटेड के प्रबंध निदेशक चेतन थादेश्वर का कहना है कि केंद्रीय बजट 2026 के मद्देनजर, घरेलू खपत को मजबूत करना एक प्रमुख वृहद आर्थिक प्राथमिकता होनी चाहिए। बढ़ती मुद्रास्फीति ने परिवारों की क्रय शक्ति पर दबाव डाला है। उपभोक्ता-अनुकूल बजट—जिसमें सोने के आयात शुल्क का युक्तिकरण, अप्रत्यक्ष करों में स्थिरता और सामर्थ्य बढ़ाने वाले उपाय शामिल हों—अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस बढ़ी हुई मांग का आभूषण उद्योग की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे विनिर्माण, खुदरा, निर्यात और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
स्वर्ण उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को सोने को केवल आभूषण के रूप में नहीं, बल्कि निवेश के रूप में भी देखना चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, मास्टर ट्रस्ट ग्रुप के निदेशक जशन अरोरा ने बताया कि सोने पर आयात शुल्क और करों में बार-बार होने वाले बदलावों से कीमतों में अचानक वृद्धि होती है, जिससे जनता चौंक जाती है। राज्य स्वर्ण एवं रजत (एसजीबी) योजना को पुनर्जीवित करना भी महत्वपूर्ण है। यह योजना पहले निवेशकों के लिए आकर्षक थी क्योंकि सरकार 2.5% ब्याज और कर लाभ प्रदान करती थी। इसे 2024 में बंद कर दिया गया था।
विशेषज्ञ चाहते हैं कि सरकार डिजिटल सोने को बढ़ावा दे – जैसे कि जागरूकता अभियान या कर छूट के माध्यम से। इससे घरेलू सोने को बर्बाद होने से बचाया जा सकेगा और इसके बजाय इसे अर्थव्यवस्था में लाया जा सकेगा।
जीएसटी में राहत
वर्तमान में आभूषणों पर 3% जीएसटी लगता है। अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण घरेलू परिषद (जीजेसी) इसे घटाकर 1.25% या 1.5% करने की मांग कर रही है। इससे आभूषण सस्ते होंगे, मध्यम वर्ग और ग्रामीण निवासियों द्वारा अधिक खरीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा और कार्यशील पूंजी पर दबाव कम होगा।