पान की फसल में बीमारी से नुकसान, योजनाओं का लाभ न मिलने से किसान परेशान

Saroj kanwar
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Chhatarpur News: महाराजपुर और गढ़ीमलहरा क्षेत्र के पान किसान इस समय बड़ी परेशानी का सामना कर रहे हैं। पहले जहां पान की खेती से परिवार का खर्च चल जाता था, अब लगातार घाटा हो रहा है। फरवरी-मार्च के दौरान किसानों ने लाखों रुपए खर्च कर बरेजे तैयार किए और पान की बेलें लगाईं। लेकिन फसल पर रोग लगने से पत्ते झड़ने लगे हैं, बेलें सड़ रही हैं और नई पत्तियां नहीं आ रहीं।

किसानों का कहना है कि पान अनुसंधान केंद्र से कोई वैज्ञानिक सलाह देने नहीं आता। वहीं, शासन की किसी योजना का लाभ भी उन्हें नहीं मिल रहा। बरेजे, बेल और बांस बल्ली पर खर्च तो बहुत होता है, लेकिन नुकसान की भरपाई नहीं हो पाती। मौसम और बीमारी से फसल खराब हो जाए तो भी मुआवजा नहीं मिलता। पटवारी सर्वे तो करते हैं, लेकिन अधिकारी कहते हैं कि शासन से राशि नहीं आई।

किसानों ने यह भी बताया कि प्रशिक्षण नहीं होता और सब्सिडी भी नहीं मिलती। पहले पूर्व मुख्यमंत्रियों ने पान अनुसंधान केंद्र और बांस बल्ली डिपो खोलने की घोषणा की थी, लेकिन वह अब तक पूरी नहीं हुई। इन हालातों के कारण अब पान की खेती का रकबा साल दर साल घटता जा रहा है।

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