पंचायतों में काम न मिलने से मजदूरी के लिए परिवार सहित हो रहा महानगरों की ओर पलायन

Saroj kanwar
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Chhatarpur News: महाराजपुर क्षेत्र के कई गांवों से लोग रोजगार की तलाश में परिवार समेत बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के पहले सप्ताह में यह प्रवास अधिक होता है। ये लोग दिल्ली, मुंबई, हरियाणा, पंजाब, जम्मू कश्मीर, सूरत, अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद, लखनऊ जैसे महानगरों में भवन, सड़क, फैक्ट्री और पुल निर्माण के काम करते हैं। कुछ लोग ईंट भट्टों पर भी काम करते हैं।

नेगुवा गांव के पूर्व सरपंच दिबिया अहिरवार ने बताया कि लगभग आधे से ज्यादा लोग विभिन्न शहरों में काम करने गए हैं। ढिगपुरा और उर्दमऊ जैसे गांवों से भी 50 से 55 प्रतिशत लोग पलायन कर चुके हैं। ये लोग आमतौर पर अप्रैल में गांव लौटते हैं और फिर जुलाई में फिर से चले जाते हैं।

स्थानीय स्तर पर मजदूरी के अवसर कम होने के कारण लोग महानगरों का रुख करते हैं। पंचायतों में काम मिलता भी है, लेकिन मजदूरी कम और भुगतान में देरी होती है। एक दिन की मजदूरी लगभग 261 रुपये होती है, जबकि महानगरों में 600 से 700 रुपये मिलते हैं और काम लगातार मिलता रहता है।

गुदारा गांव की महिला सरपंच कुसुम रिछारिया ने कहा कि अब मजदूर केवल बच्चों की शादी या त्यौहार पर ही गांव आते हैं। कई परिवारों ने बड़े शहरों में मकान भी बना लिए हैं। यदि स्थानीय मजदूरी बेहतर होती तो लोग पलायन बंद कर देते।

पलायन के कारण कई गांवों में कई घर ताले लगे हुए हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों का विकास प्रभावित हो रहा है।

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