दो नदियों के बीच बसा सेंधपा, जहां बसी है ऐतिहासिक द्रोणगिरी गुफा

Saroj kanwar
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Chhatarpur News: छतरपुर जिले से 63 किमी दूर सेंधपा गांव दो नदियों – काठन और श्यामरी – के बीच बसा है। यहां मौजूद द्रोणगिरी पर्वत और उसकी गुफा जैन धर्म के लिए खास धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखती है। इसी गुफा में गुरुदत्त स्वामी मुनिराज ने तप कर कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया था। गुफा में आज भी उनके चरण चिन्ह सुरक्षित हैं।

द्रोणगिरी पर्वत पर 78 जैन मंदिर हैं, जिनमें त्रिकाल चौबीसी जैसे विशेष मंदिर भी शामिल हैं। यहां 10वीं शताब्दी के चंदेलकालीन चतुर्मुखी मानस्तंभ में 108 जिन प्रतिमाएं बनी हैं। जैन कथाओं में वर्णित सुकुमाल मुनि की कथाएं यहां की कलाकृतियों में झलकती हैं, जो संग्रहालय में रखी गई हैं।

जैन संत आचार्य शांति सागर, विद्यासागर और विराग सागर का भी यह स्थान साक्षी रहा है। इसी वजह से इसे “लघु सम्मेद शिखर” कहा जाता है। यहां एक जैन प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान भी है, जो हर साल करीब 100 युवाओं को तीर्थ स्थलों पर नौकरी दिलाने के लिए तैयार करता है।गांव की जनसंख्या करीब 3650 है, साक्षरता दर 72% है। गांव में 12वीं तक सरकारी स्कूल है, लेकिन उच्च शिक्षा की सुविधा नहीं है। लोग मुख्य रूप से खेती और मछली पालन से जीवन यापन करते हैं। एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी है, मगर स्टाफ की कमी है। गांव में कुछ शासकीय भवन जर्जर हालत में हैं।

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