दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना: कौशल प्रशिक्षण, 1 लाख रुपये की सहायता और स्थायी रोजगार, जानें विवरण

Saroj kanwar
4 Min Read

दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना: केंद्र सरकार द्वारा 2014 में शुरू की गई दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (DDU-GKY) का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को रोज़गार के योग्य बनाना है। यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित है और वर्तमान में पूरे देश में लागू है। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया जाता है और निजी क्षेत्र में रोज़गार के अवसर प्रदान किए जाते हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और गरीबी रेखा से ऊपर उठ सकें।

योजना का उद्देश्य और पात्रता

इस योजना का मुख्य उद्देश्य 15 से 35 वर्ष की आयु के ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करना और उन्हें रोज़गार के योग्य बनाना है। यह योजना गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले और सीमित रोज़गार के अवसरों वाले युवाओं के लिए है। सरकार का उद्देश्य इन युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करना और उन्हें स्थायी रोज़गार प्रदान करना है ताकि वे समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें।

किस क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है?

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के तहत, युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाता है, जिनमें विद्युत, प्लंबिंग, आतिथ्य, स्वास्थ्य सेवा, निर्माण, ऑटोमोबाइल और चमड़ा उद्योग शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में युवाओं को व्यावहारिक और तकनीकी ज्ञान प्रदान किया जाता है ताकि वे आत्मविश्वास से रोज़गार पा सकें।

सामाजिक समावेशन पर विशेष ध्यान

सरकार ने इस योजना में सामाजिक समावेशन को प्राथमिकता दी है। कुल आवंटित धनराशि का 50 प्रतिशत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए, 15 प्रतिशत अल्पसंख्यकों के लिए और 3 प्रतिशत विकलांग व्यक्तियों के लिए निर्धारित है। इसके अलावा, चयनित उम्मीदवारों में से एक-तिहाई महिलाएँ होनी चाहिए। यह पहल न केवल सामाजिक संतुलन को बढ़ावा देती है, बल्कि महिला सशक्तिकरण को भी प्रोत्साहित करती है।

वित्तीय सहायता और रोज़गार की गारंटी

इस योजना की एक प्रमुख विशेषता यह है कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, प्रशिक्षित युवाओं को रोज़गार देने की ज़िम्मेदारी सरकार की होती है। इस योजना के तहत, उम्मीदवारों को ₹25,000 से ₹1 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह सहायता प्रशिक्षण के प्रकार और परियोजना की अवधि पर निर्भर करती है। इसके बाद युवाओं को न्यूनतम वेतन या उससे अधिक वेतन वाली नौकरियाँ प्रदान की जाती हैं।

एजेंसियों की भूमिका
इस परियोजना में शामिल एजेंसियां ​​युवाओं का चयन, उन्हें प्रशिक्षण और नियुक्ति प्रदान करने के लिए ज़िम्मेदार हैं। वे रोज़गार के अवसर सुनिश्चित करने के लिए निजी कंपनियों के साथ साझेदारी करती हैं। यह योजना केवल प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के लिए रोज़गार की गारंटी भी देती है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ

इस योजना के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलने से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। प्रशिक्षित युवाओं के रोजगार से गांवों में आय के नए स्रोत पैदा हो रहे हैं और धीरे-धीरे पलायन की समस्या कम हो रही है।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *