नई दिल्ली: अमेरिका ने हाल ही में टैरिफ कम करके भारत को महत्वपूर्ण राहत दी है और दुनिया को यह संदेश दिया है कि वह भारत का साझेदार बना रहेगा। दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है और कई देश इस गतिरोध में ईरान का साथ देते नजर आ रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान का समर्थन करने वाले देशों के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने ईरान के साथ व्यापार बढ़ाने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इस फैसले को ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालने के एक तरीके के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने इससे पहले भी ईरान के व्यापारिक साझेदार देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।
अमेरिका की नई व्यवस्था क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, यदि कोई देश ईरान से तेल, गैस या अन्य सामान खरीदता है या उसके साथ किसी भी प्रकार का व्यापार करता है, तो उस देश से आने वाले सामान पर 25 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
अमेरिका ने ईरान पर अपनी गलत नीतियों के जरिए मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया है। ट्रंप प्रशासन का यह भी कहना है कि यह आर्थिक दबाव डालकर ईरान को अपना व्यवहार बदलने के लिए मजबूर करने का प्रयास है। इसी वजह से अमेरिका ने ईरान पर कई प्रतिबंध लगाए हैं।
किन देशों पर इसका असर पड़ सकता है?
यदि अमेरिका ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर शुल्क लगाता है, तो कई प्रमुख देश प्रभावित हो सकते हैं। कुछ देश ईरान के साथ व्यापार करना जारी रखते हैं, और अमेरिका की धमकी के बावजूद, उनके ईरान को व्यापारिक साझेदार के रूप में छोड़ने की संभावना नहीं है।
इनमें चीन, भारत, तुर्की और कुछ खाड़ी देश शामिल हैं। भारत ईरान से तेल का एक प्रमुख आयातक भी है। यदि ये देश ईरान के साथ व्यापार करना जारी रखते हैं, तो उन्हें अमेरिका के साथ अपने व्यापार में नुकसान हो सकता है। कई देशों ने अमेरिका के इस निर्णय पर चिंता व्यक्त की है।