डिजिटल ट्रांजेक्शन के बढ़ने के बावजूद बैंकों में जमा हुई 3.79 लाख करोड़ की नकदी

Saroj kanwar
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Digital vs Cash: भले ही डिजिटल लेनदेन में तेजी आई हो, लेकिन देश में नकदी की कोई कमी नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, बैंकों के चालू और बचत खातों में जमा राशि जून 2025 तक बढ़कर 3.79 लाख करोड़ रुपये हो गई है। सिर्फ बैंकों में ही नहीं, बल्कि आम लोगों के पास भी नकदी का भंडार है। जो 31,000 करोड़ से बढ़कर 91,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

नकदी में यह उछाल कई कारणों से हुआ है, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की तेजी, सरकारी योजनाओं की मदद और जरूरी चीजों की कीमतों में स्थिरता शामिल है। मनरेगा जैसी योजनाओं से लोगों को अच्छी मजदूरी मिल रही है और जनधन खातों में सीधे सब्सिडी आने से भी नकदी का प्रवाह बढ़ा है।

ग्रामीण इलाकों में अब भी नकद का इस्तेमाल अधिक है, हालांकि डिजिटल भुगतान जैसे UPI भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ICICI सिक्योरिटीज की रिपोर्ट बताती है कि शहरी मांग की तुलना में ग्रामीण मांग फिलहाल बेहतर स्थिति में है।एचडीएफसी सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 112 ग्रामीण जिलों में प्रति व्यक्ति सालाना आय 2,000 डॉलर से अधिक हो चुकी है। इससे साफ है कि गांव अब कृषि से आगे बढ़कर सेवा क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं।

इसके अलावा, अनुकूल मानसून, फसलों के लिए बेहतर न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खर्च बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर बिक्री रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है, जो आर्थिक विकास का संकेत है। कुल मिलाकर, ग्रामीण भारत अब सिर्फ उत्पादन का नहीं बल्कि खपत और आर्थिक विकास का भी एक बड़ा केंद्र बन रहा है।

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