डिजिटल इंडिया 2026: जानिए कैसे आधार, यूपीआई और ओएनडीसी भारतीय लोकतंत्र को नया रूप दे रहे हैं

Saroj kanwar
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डिजिटल इंडिया: गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर, भारत का चेहरा पूरी तरह बदल गया है। भारत का लोकतंत्र अब केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित नहीं है; यह हर नागरिक के स्मार्टफोन में जीवंत है। “डिजिटल इंडिया” अभियान ने आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर और ओएनडीसी जैसे शक्तिशाली प्लेटफार्मों के माध्यम से शासन और व्यापार की संपूर्ण संरचना को पुनर्जीवित किया है।

आज, कैशलेस भुगतान, पेपरलेस प्रक्रियाएं और डेटा-आधारित, पारदर्शी मॉडल ने एक साझा तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया है जो विकसित देशों के लिए भी एक उदाहरण है। क्या भारत वास्तव में विश्व का पहला “डिजिटल गणराज्य” बन गया है?

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डिजिटल इंडिया: गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर, भारत का चेहरा पूरी तरह बदल गया है। भारत का लोकतंत्र अब केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित नहीं है; यह हर नागरिक के स्मार्टफोन में जीवंत है। “डिजिटल इंडिया” अभियान ने आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर और ओएनडीसी जैसे शक्तिशाली प्लेटफार्मों के माध्यम से शासन और व्यापार की संपूर्ण संरचना को पुनर्जीवित किया है।

आज, कैशलेस भुगतान, पेपरलेस प्रक्रियाएं और डेटा-आधारित, पारदर्शी मॉडल ने एक साझा तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया है जो विकसित देशों के लिए भी एक उदाहरण है। क्या भारत वास्तव में विश्व का पहला “डिजिटल गणराज्य” बन गया है?

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डिजिटल लॉकर ने कागजी शासन के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाई है। अब आपको ड्राइविंग लाइसेंस, मार्कशीट या बीमा जैसे भौतिक दस्तावेज़ साथ रखने की ज़रूरत नहीं है। डिजिटल लॉकर पर उपलब्ध डिजिटल दस्तावेज़ पूरी तरह से कानूनी रूप से मान्य हैं। इससे न केवल नागरिकों का समय बचा है, बल्कि सरकारी विभागों में कागजी कार्रवाई और फाइलों के ढेर भी खत्म हुए हैं। यह डिजिटल सशक्तिकरण का एक बेहतरीन उदाहरण है।

ONDC
ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) ने भारत के ई-कॉमर्स क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है। पहले ऑनलाइन बाज़ार पर कुछ बड़ी कंपनियों का एकाधिकार था, लेकिन ONDC ने छोटे दुकानदारों और स्थानीय व्यापारियों को भी बड़ी कंपनियों के समान मंच उपलब्ध कराया है।

यह एक ‘खुला और परस्पर संचालित’ मंच है, जहां कोई भी विक्रेता भारी कमीशन दिए बिना देश भर के ग्राहकों तक पहुंच सकता है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ का चेहरा है, जहां डिजिटल बाज़ार सभी को समान अवसर प्रदान करता है।

FASTag और गेम
FASTag ने भारत के राजमार्गों पर टोल प्रणाली को पूरी तरह से बदल दिया है। टोल प्लाजाों पर लंबी कतारें अब बीते दिनों की बात हो गई हैं, जिससे सालाना लाखों लीटर ईंधन की बचत होती है और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आती है। वहीं, GeM (सरकारी ई-मार्केटप्लेस) ने सरकारी खरीद में पारदर्शिता का एक नया उदाहरण पेश किया है। सरकारी विभाग अब ऑनलाइन ई-बिडिंग के माध्यम से रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदते हैं, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो जाती है और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद कम कीमतों पर उपलब्ध होते हैं।

अकाउंट एग्रीगेटर
अकाउंट एग्रीगेटर (AA) फ्रेमवर्क ने भारत में वित्तीय डेटा साझा करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से सुरक्षित और उपयोगकर्ता-नियंत्रित बना दिया है। RBI द्वारा विनियमित इस प्रणाली के तहत, व्यक्ति अपनी सहमति से किसी भी वित्तीय संस्थान के साथ अपने बैंक विवरण, बीमा और निवेश की जानकारी साझा कर सकते हैं।

इसका सबसे बड़ा लाभ ऋण प्राप्त करने में हुआ है। अब भौतिक दस्तावेजों और भारी कागजी कार्रवाई के बिना, वास्तविक समय के डेटा के आधार पर ऋण प्रक्रिया तेज और सस्ती हो गई है।

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