टीकमगढ़ में 80 लाख खर्च के बाद भी अधूरी और कब्जे में गोशालाएं

Saroj kanwar
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Tikamgarh News: जिले की कई ग्राम पंचायतों में गोशालाओं का निर्माण अधूरा है या उन पर अवैध कब्जा हो गया है। ग्राम रमपुरा में हवाई पट्टी के लिए स्वीकृत जमीन पर गोशाला बनाकर छोड़ दी गई, पहाड़ी खुर्द की गोशाला अधूरी है और बड़ौराघाट के सुनौरा खिरिया में गोशाला की जमीन पर खेती हो रही है। तीनों पर करीब 99 लाख में से लगभग 80 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं, फिर भी गोवंश को आश्रय नहीं मिल रहा।

सुनौरा खिरिया – कब्जे में गोशाला की जमीन
बड़ौराघाट क्षेत्र के सुनौरा खिरिया में बनी गोशाला में पानी की व्यवस्था न होने के कारण संचालन शुरू नहीं हो सका। निर्माण के बाद से ही यह खाली रही और अब स्थानीय लोगों ने जमीन पर कब्जा कर खेती शुरू कर दी है। मुख्य द्वार पर बाड़ लगाकर प्रवेश भी रोक दिया गया है। लगभग 30 लाख रुपए खर्च होने के बाद भी यहां न बोरिंग कराई गई, न कब्जा हटाया गया। सचिव शोभाराम यादव ने कहा कि पटवारी नाप कर जमीन की सीमा तय करेंगे, जिससे आगे कार्रवाई हो सके।

पहाड़ी खुर्द – टीनशेड तक अधूरा निर्माण
ग्राम पहाड़ी खुर्द में गोशाला का निर्माण शुरू तो हुआ, लेकिन एस्टीमेट से ज्यादा राशि निकालने के बाद काम रोक दिया गया। करीब 20 लाख रुपए खर्च होने के बावजूद टीनशेड तक नहीं डल पाया। दीवारों में दरारें आ गई हैं और स्थिति जस की तस है। सचिव रामेश्वर घोष के अनुसार, यह निर्माण पूर्व पदस्थ पंचायत अधिकारियों के समय शुरू हुआ था और जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं।

रमपुरा – हवाई पट्टी की जमीन पर निर्माण
ग्राम रमपुरा में मोहनगढ़ तिगैला के पास मनरेगा से लगभग 20 लाख रुपए खर्च कर गोशाला का निर्माण शुरू किया गया। सीमांकन में यह जमीन हवाई पट्टी के लिए स्वीकृत निकली और साथ ही अवैध कब्जे भी मिले। इसके चलते काम रोकना पड़ा। वर्तमान में अधूरी गोशाला के पास गोवंश के शव पड़े हैं। सचिव कृष्णकांत यादव ने बताया कि यह जमीन चयन उनके कार्यभार संभालने से पहले हुआ था, निर्माण पूरा कराने की अनुमति के लिए जिला पंचायत को अवगत कराया गया है, पर अब तक स्वीकृति नहीं मिली।

गोशालाओं की अधूरी हालत पर प्रशासन की प्रतिक्रिया
अधिकारियों ने कहा कि हाल ही में चार्ज लेने के बाद सभी गोशालाओं की स्थिति की जानकारी ली जा रही है। जहां-जहां समस्या है, वहां समाधान कर संचालन शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।

जिले में मनरेगा से गोशाला निर्माण के लिए राशि बंद होने के कारण 15 गोशालाएं अधूरी रह गई हैं। यदि समय पर निर्माण और संचालन होता, तो सड़कों पर भटकते बेसहारा गोवंश को आश्रय मिल सकता था। वर्तमान हालात में न केवल करोड़ों का सरकारी बजट व्यर्थ जा रहा है, बल्कि गोवंश की सुरक्षा और देखभाल का उद्देश्य भी अधूरा है।

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