जिला अस्पताल में प्रसूताओं को पौष्टिक आहार न मिलने से परेशानियां

Saroj kanwar
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Chhatarpur News: जिला अस्पताल में भर्ती गर्भवती और प्रसूता महिलाओं को आहार में कई जरूरी चीजें नहीं मिल रही हैं। उन्हें पपीता, सेब, गुड़-मेवा, चावल, सलाद और चाय के साथ बिस्किट तक नहीं दिया जा रहा। अस्पताल में आहार के नाम पर सिर्फ सब्जी, दाल, दलिया और रोटी दी जा रही है। ऐसा बताया जाता है कि करीब 2.70 लाख रुपए का आहार हर महीने आउटसोर्स ठेकेदार द्वारा दिया जाना था, लेकिन वह ठीक से नहीं मिल पा रहा।

प्रसूता महिलाएं और उनके अटेंडर इस बात से दुखी हैं कि अस्पताल में पोषण आहार का ध्यान नहीं रखा जा रहा। कई महिलाओं ने बताया कि तीन दिन के भर्ती रहने में भी उन्हें फल या गुड़ मेवा नहीं मिला। चाय के साथ बिस्किट तक नहीं दिया गया। दूध भी कम गुणवत्ता वाला मिलता है।

अस्पताल में सामान्य मरीजों को 50 रुपए की दर से आहार मिलता है, लेकिन प्रसूताओं के लिए 100 रुपए की डाइट भी सही से नहीं दी जा रही। मेटरनिटी वार्ड में लगभग 180 महिलाएं भर्ती रहती हैं, इसलिए एक दिन में 18 हजार रुपए और महीने में लगभग 5.40 लाख रुपए आहार पर खर्च होना चाहिए। लेकिन आहार गुणवत्ता और मात्रा दोनों कम है।

प्रसूता महिलाओं को सुबह-शाम चाय, नाश्ते में दूध, मीठा दलिया, पपीता, गुड़ मेवा, दोपहर में सलाद, रोटी, सब्जी, दाल, चावल और रात में भी सही आहार मिलना जरूरी होता है। लेकिन ये सुविधाएं अस्पताल में नहीं मिल रही हैं।

नॉर्मल डिलीवरी वाले मरीजों को तीन दिन और सीजर डिलीवरी वाले को सात दिन के लिए आहार का भुगतान किया जाता है, लेकिन कई बार छुट्टी जल्दी कर दी जाती है। इस बीच भुगतान पूरा हो जाता है।

अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन को इस बात की जानकारी है, लेकिन अभी तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। शिकायतों के बाद भोपाल प्रशासन को पत्र भी लिखा गया है। अगर जल्द सुधार नहीं होता तो ठेकेदार को बदलने की मांग की जाएगी।

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