घटिया सीसी रोड निर्माण का पर्दाफाश, लैब रिपोर्ट में गड़बड़ी और कोर कटिंग का कोई रिकॉर्ड नहीं

Saroj kanwar
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Chhatarpur News: शहर के कई वार्डों में नगर पालिका द्वारा कराए गए सीसी रोड और नाली निर्माण में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। ठेकेदारों द्वारा घटिया निर्माण किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद नगर पालिका के इंजीनियर भुगतान कर रहे हैं। नतीजा यह है कि 3 से 6 महीने में सड़कें उखड़ने लगी हैं और नालियां कमजोर हो रही हैं।

जानकारी के अनुसार, ठेकेदारों की मिलीभगत से लैब रिपोर्ट में सड़क की मोटाई अधिक दिखाई जाती है। जबकि वास्तव में सीसी सड़कों की मोटाई 4 से 5 इंच होती है, रिपोर्ट में 7 से 8 इंच दर्शाई जाती है। निर्माण में सीमेंट और बालू की मात्रा भी मानकों से कम होती है। ठेकेदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सैंपल (कोर कटिंग) लिए बिना ही 8-10 हजार में लैब रिपोर्ट बनवा ली जाती है।

वार्ड 11 की रिपोर्ट में गड़बड़ी

वार्ड 11 में बनी सीसी रोड और नाली की रिपोर्ट अप्रैल में भोपाल की एक लैब से बनाई गई थी। लेकिन उसमें यह नहीं बताया गया कि सैंपल कहां से लिया गया। रिपोर्ट में सड़क की मोटाई 5 इंच होते हुए भी 7 इंच दिखाई गई। जब लैब संचालक से इस पर बात की गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें सैंपल वार्ड से मिला था लेकिन बाकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

शुक्लाना मोहल्ला की सड़कें जल्द उखड़ीं

वार्ड 27 के शुक्लाना मोहल्ला में महावीर स्कूल के पास तीन महीने पहले बनी सड़क कुछ ही समय में उखड़ गई। दूसरी सड़क जो जनवरी में बनी थी, वह भी उखड़ने लगी है। दोनों सड़कों की लागत करीब 25 लाख रुपए थी। निवासियों ने बताया कि सड़क की ऊपरी परत में गिट्टी बाहर आ गई है और ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

चौबे कॉलोनी की सड़कें भी कमजोर

यहां एक साल और दो महीने पहले बनी दो सड़कों की हालत भी खराब हो चुकी है। लोगों ने बताया कि निर्माण में सीमेंट और बालू की मात्रा कम थी, इसलिए बारिश का पानी गिरते ही सड़क की ऊपरी परत बह गई और गिट्टी दिखने लगी है।

वार्ड 20 की नाली निर्माण में बिना शटरिंग काम

वार्ड 20 में 80 लाख की लागत से हुए नाली निर्माण में गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां बिना शटरिंग के ही नाली की दीवारें बनाई जा रही हैं। लोगों ने बताया कि दीवारें टेढ़ी हैं, मोटाई कम है और ढाल न होने से पानी भराव की समस्या होगी। बावजूद इसके सुधार नहीं हो रहा।

उपयंत्री ने दी थी चेतावनी, फिर भी भुगतान

वार्ड 11 में पूरनलाल कुशवाहा द्वारा 22 लाख की लागत से बनाई गई सड़क में भी घटिया निर्माण मिला था। उपयंत्री ने नोटिस दिया था, जिसके बाद थोड़ी सी मरम्मत कर दी गई और फिर पूरा भुगतान कर दिया गया।

टीएस के नियमों का पालन नहीं

टीएस के अनुसार निर्माण लागत 25 लाख से ज्यादा होने पर साइट पर लैब होनी चाहिए और सभी मटेरियल की जांच जरूरी होती है। शटरिंग, मिक्सर और वाइब्रेटर का उपयोग अनिवार्य है। लेकिन इन नियमों का पालन नहीं हो रहा। जिम्मेदारी नगर पालिका सीएमओ की है।

ईई बोले- जांच कराएंगे

नगर प्रशासन सागर के ईई मेघ तिवारी ने कहा कि जिन सड़कों की समय से पहले हालत खराब हुई है, उनकी जांच कराई जाएगी और कोर न काटने पर संबंधित इंजीनियर से जवाब लिया जाएगा।

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