गौशाला में शव और कंकाल, हरी-भरी जमीन पर सूखा चारा

Saroj kanwar
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Mandsaur News: रविवार को सामने आए वीडियो ने गौशाला की स्थिति की गंभीरता उजागर कर दी। मृत गायों के शवों को ट्रैक्टर-ट्रॉली से ले जाने के दृश्य जितने अमानवीय थे, उससे कहीं ज्यादा खराब हालत गुराड़िया माता सरकारी गौशाला की मिली। परिसर के आसपास कई कंकाल और शव पड़े थे, साथ में उनकी खाई हुई पॉलिथीन भी दिखी। गौशाला की वास्तविक संख्या भी गलत सामने आई; पंचायत सचिव ने एक दिन पहले 80 गायों और बछड़ों की बात की थी, जबकि वास्तविकता में सिर्फ 64 गायें और बछड़े मौजूद थे।

गौशाला के पास 10 बीघा हरी-भरी जमीन होने के बावजूद गायों को ताजगी भरा चारा नहीं मिल रहा। यहां गायें केवल सूखे भूसे पर निर्भर हैं। जब टीम गौशाला पहुंची, तो देखरेख करने वाला कर्मचारी नहीं मिला। परिवार के सदस्यों ने बताया कि वे सीमित वेतन पर काम करते हैं और भुगतान नियमित नहीं होता।

गौशाला से थोड़ी दूर लगभग 20,000 वर्ग फीट क्षेत्र में 30 से अधिक कंकाल और 5 मृत गायों के शव पाए गए। कुछ शवों को जमीन में दबा दिया गया, जबकि अन्य को फोरलेन की तरफ फेंक दिया गया। तेज दुर्गंध के कारण आसपास के लोग परेशान थे। स्थानीय युवाओं ने बताया कि वीडियो सामने आने के बाद कमजोर गायों को जंगल में छोड़ दिया गया।

गौशाला के भीतर नालों में सूखा भूसा भरा था, जिसमें पत्थर भी मिले। कुछ कट्टों में खल रखा गया था, लेकिन गायों को खिलाने के पर्याप्त साधन नहीं थे। बाहर कुछ गायें और भैंसें चर रही थीं, लेकिन हरे चारे का सही उपयोग नहीं हो रहा था।

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया कि गौशाला में नियमित साफ-सफाई, पर्याप्त चारा और कमजोर गायों की देखभाल सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि गौशाला का उद्देश्य गायों की सेवा है, दुर्दशा दिखाने का नहीं।

प्रशासन ने भी स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया है। जांच और उचित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, बीमारी की जांच कर गायों का उपचार करने तथा मृत गायों के शवों को व्यवस्थित तरीके से निस्तारित करने की व्यवस्था करने को कहा गया है।

गौशाला की यह स्थिति न केवल पशुओं के लिए चिंता का विषय है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करती है। ग्रामीण और कर्मचारी दोनों ही सुधार की तत्काल मांग कर रहे हैं।

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