गोशालाएं कागजों पर चालू, मवेशी सड़कों व खेतों में; चारा-पानी का संकट

Saroj kanwar
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Chhatarpur News: राजनगर जनपद की पंचायतों में 37 लाख रुपये खर्च कर गोशालाएं बनाई गईं और संचालन की जिम्मेदारी स्व-सहायता समूहों को दी गई, लेकिन ज्यादातर गोशालाएं कागजों पर ही चल रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार, मवेशियों को रात में गोशालाओं में बंद किया जाता है और सुबह भूखा-प्यासा छोड़ दिया जाता है। खाने-पीने की व्यवस्था नहीं होने से मवेशी खेतों में घुसकर फसलें नष्ट कर रहे हैं और झुंड में सड़कों पर बैठ रहे हैं, जिससे हादसे हो रहे हैं।

छतरपुर-पन्ना एनएच 39 पर बसारी ब्रिज, गंज ब्रिज, देवगांव तिराहा, खैरी तिराहा, घूरा रोड और बमीठा ब्रिज पर रोज सैकड़ों मवेशी यातायात बाधित करते हैं। झमटुली पंचायत की गोशाला में तीन महीने से एक भी मवेशी नहीं है। सलैया पंचायत की गोशाला भी खाली है। कदौहा पंचायत की गोशाला में भूसे की टंकी खाली है और पानी की सुविधा नहीं है।

कुटिया पंचायत की गोशाला पांच महीने से बंद है। यहां के मवेशी दिदौनियां और टपरियन गांवों में घूम रहे हैं। सरपंच और सचिव के मुताबिक, बछड़ाघर, भूसा घर और कर्मचारी के ठहरने की व्यवस्था नहीं है। आवेदन देने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। डॉक्टर हर महीने चेकिंग के लिए आते हैं, लेकिन सूचना मिलते ही उस दिन मवेशियों को अंदर कर दिया जाता है, बाकी दिन गोशालाएं खाली रहती हैं।

स्व-सहायता समूह संचालकों का कहना है कि समय पर बजट नहीं मिलने से चारा-पानी की व्यवस्था नहीं हो पाती। पिछले महीने का बजट अब मिला है, जिससे भूसे की व्यवस्था शुरू की गई है। उनका कहना है कि हर महीने बजट मिले तो हालात सुधर सकते हैं।

सीईओ राकेश शुक्ला ने बताया कि अधिकारियों को भेजकर जांच करवाई जाएगी और यह पता किया जाएगा कि समूह संचालक मवेशियों को अंदर क्यों नहीं कर रहे। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।

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