सरकारी कृषि योजनाएँ: बिहार सरकार ने कृषि में आधुनिक तकनीक अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने के लिए, कृषि विभाग के राज्य बागवानी निदेशालय ने दो ‘ऊतक संवर्धन प्रयोगशालाएँ’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। ये प्रयोगशालाएँ पौधों की सामग्री का उत्पादन करेंगी, जो किसानों को किफायती दामों पर उपलब्ध होगी, जिससे उन्हें खेती की लागत कम करने में मदद मिलेगी।
ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला के लिए आवेदन
बागवानी निदेशालय ने ऊतक संवर्धन प्रयोगशालाएँ स्थापित करने के लिए इच्छुक संस्थानों और व्यक्तियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। ये प्रयोगशालाएँ पौधों की गुणवत्ता में सुधार करेंगी और किसानों को स्वस्थ, उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराएंगी।
प्रयोगशालाओं की संख्या और लागत
बिहार में कुल दो टिशू कल्चर प्रयोगशालाएँ स्थापित की जाएँगी। प्रत्येक प्रयोगशाला की कुल लागत 4.85 करोड़ रुपये होगी, जिसमें से 50%, यानी 2.42 करोड़ रुपये, राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में प्रदान किए जाएँगे। शेष राशि आवेदक को वहन करनी होगी।
किसानों को लाभ
किसानों को इन प्रयोगशालाओं से किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण पौधे मिलेंगे। इससे उनकी खेती की लागत कम होगी और प्रति हेक्टेयर आय में वृद्धि होगी।
ऊतक संवर्धन प्रौद्योगिकी के लाभ
ऊतक संवर्धन प्रौद्योगिकी से किसी भी मौसम में पौधों का उत्पादन संभव है। यह प्रौद्योगिकी पौधों में रोगों के खतरे को कम करती है और दुर्लभ या लुप्तप्राय पौधों की किस्मों के संरक्षण को भी संभव बनाती है।
आवेदन की समय सीमा
ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला के लिए आवेदन 31 जनवरी, 2026 तक जमा किए जा सकते हैं। अंतिम तिथि के बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि आवेदनों की संख्या निर्धारित संख्या से अधिक हो जाती है, तो चयन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा।
आवेदन कहाँ करें
इच्छुक आवेदक बागवानी निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट https://horticulture.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल ऑनलाइन ही स्वीकार किए जाएंगे और सही जानकारी भरना अनिवार्य है; अन्यथा आवेदन अस्वीकृत किया जा सकता है।