क्या बीमा सस्ता होने वाला है? पॉलिसीधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी!

Saroj kanwar
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बीमा अपडेट: अगर आपको लगता है कि बीमा महंगा हो गया है, तो यह खबर आपके लिए उपयोगी है। बीमा नियामक IRDA अगले चार से छह महीनों में कई बड़े सुधार लागू कर रहा है, जिससे बीमा किफायती हो जाएगा और आपको अपने पैसे का पूरा मूल्य मिलेगा। इन बदलावों का सबसे बड़ा असर बीमा कंपनियों द्वारा एजेंटों और बैंकों को दिए जाने वाले भारी कमीशन पर पड़ेगा।

बीमा सुगम जल्द ही एक डिजिटल मार्केटप्लेस लॉन्च करेगा, जहां आप अमेज़न और फ्लिपकार्ट की तरह सभी बीमा कंपनियों की पॉलिसियों की तुलना कर सकेंगे। कीमतें, सुविधाएं, दावा निपटान अनुपात – सब कुछ एक क्लिक में। एक बार सब कुछ सबके लिए उपलब्ध हो जाने पर, कंपनियों को प्रीमियम कम रखना होगा।

1 लाख करोड़ रुपये का सवाल
ज़रा सोचिए, वित्त वर्ष 2025 में बीमा कंपनियों ने सिर्फ़ कमीशन के रूप में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये बांटे। यह वही पैसा है जो प्रीमियम के रूप में आपकी जेब से निकलता है। आरबीआई और आईआरडीए दोनों ने इस पर चिंता जताई है। अब नियामक इन वितरण लागतों को युक्तिसंगत बनाने के लिए काम कर रहा है।

30% लागत पर कटौती
वर्तमान में, बीमा कंपनियां आपके प्रीमियम का 30% वितरण और प्रशासनिक लागतों पर खर्च करती हैं। इसमें से 17-18% सीधे बैंकों, एनबीएफसी और एजेंटों के पास जाता है। आईआरडीए अब इस राशि को कम करने की तैयारी कर रहा है, खासकर स्वास्थ्य बीमा में, जहां प्रीमियम में तेज़ी से वृद्धि हुई है। नियामक आईआरडीए एक सहमति-आधारित डेटा रजिस्ट्री बना रहा है जहां सभी पॉलिसी और दावों का डेटा संग्रहीत किया जाएगा। इससे अंडरराइटिंग में तेज़ी आएगी, धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा और पॉलिसी पोर्टेबिलिटी आसान होगी। इसका मतलब है कम लागत, तेज़ प्रोसेसिंग और अधिक पारदर्शिता।

आईआरडीए बीमा कंपनियों पर अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है। कंपनियों को अब अपने उत्पादों, रिटर्न और दावा निपटान अनुपात का सार्वजनिक रूप से खुलासा करना होगा। एक बार जब सब कुछ सार्वजनिक हो जाएगा, तो कंपनियां बेहतर सेवा और प्रतिस्पर्धी कीमतों के लिए होड़ करेंगी।

आम आदमी को क्या मिलेगा?
आपको इन सुधारों से सीधा लाभ होगा। कमीशन लागत में कमी से प्रीमियम स्थिर रह सकते हैं या कम भी हो सकते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पॉलिसियों की तुलना करने से आपको बेहतर और किफायती पॉलिसियां ​​चुनने में मदद मिलेगी। आपको पता रहेगा कि आपका पैसा कहां जा रहा है, और डिजिटल बुनियादी ढांचा दावा प्रक्रिया को गति देगा। इन बदलावों का असर स्वास्थ्य और जीवन बीमा में विशेष रूप से स्पष्ट होगा, जहां बढ़ती लागतों ने मध्यम वर्ग पर दबाव डाला है।

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