पश्चिम बंगाल सरकार की इस जनकल्याणकारी योजना का नाम कृषक बंधु योजना है। यह बेहद महत्वपूर्ण है। इस योजना के ज़रिए, जिन किसानों के पास कम ज़मीन है, वे आसानी से सालाना ₹10,000 तक की आर्थिक मदद पा सकते हैं। इसके साथ ही, ₹2 लाख का जीवन बीमा लाभ भी मिलता है, जो पूरी तरह से मुफ़्त है। अगर आपके पास ज़मीन है और आप पश्चिम बंगाल के स्थायी निवासी हैं, तो यह आपके लिए एक बेहतरीन मौका है। आप बिना किसी ख़ास मेहनत के, सिर्फ़ आवेदन करके यह लाभ पा सकते हैं। बहुत से लोग अभी भी इस योजना के बारे में नहीं जानते हैं, तो बिना देर किए आज ही इसकी जानकारी हासिल करें।
कृषक बंधु योजना का मुख्य उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। किसानों को अक्सर बीज, खाद या खेती के लिए ज़रूरी अन्य चीज़ें खरीदने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसकी मदद से वे खेती के मौसम में इन खर्चों को आसानी से पूरा कर सकते हैं। अगर किसी किसान की जल्दी मृत्यु हो जाती है, तो उसका परिवार भी आर्थिक रूप से सुरक्षित रहेगा। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने में मदद करती है। कुल मिलाकर, इसका मुख्य लक्ष्य किसानों के जीवन को बेहतर बनाना है।
किसानों के जीवन स्तर में सुधार।
योजना का संक्षिप्त विवरण
केंद्र सरकार की पीएम किसान योजना की तरह, कृषक बंधु योजना भी किसानों और भूमि मालिकों के लिए शुरू की गई है। यह योजना 2019 में पश्चिम बंगाल में शुरू हुई थी। इसका प्रबंधन पश्चिम बंगाल के कृषि विभाग द्वारा किया जाता है। इसके लाभार्थी भूमि मालिक और कानूनी बटाईदार हैं। अधिकतम सहायता ₹10,000 प्रति एकड़ प्रति वर्ष है। न्यूनतम सहायता ₹4,000 प्रति वर्ष है। 2025 के लिए ₹2,930 करोड़ का आवंटन किया गया है।
किसानों को वार्षिक वित्तीय सहायता
इस योजना के तहत, भूमि मालिकों को प्रति एकड़ ₹10,000 मिलते हैं। यह धनराशि दो किश्तों में दी जाती है। पहली किश्त खरीफ सीजन के दौरान जुलाई-अगस्त में आती है। दूसरी किश्त रबी सीजन के दौरान दिसंबर-जनवरी में दी जाती है। इससे किसानों को खेती की लागत पूरी करने में मदद मिलती है और उनका काम आसान हो जाता है।
छोटे भूस्वामियों के लिए सहायता
एक एकड़ से कम ज़मीन वाले किसानों को भी सहायता मिलती है। उन्हें हर साल ₹4,000 दिए जाते हैं। यह छोटे किसानों के लिए एक विशेष लाभ है। वे खेती के छोटे-मोटे खर्च उठा सकते हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने इस तरह सभी को इसमें शामिल किया है, जिससे किसानों में समानता आती है।