किसान उगाएंगे सुगंधित पौधों की फसल, तीन साल तक मिलेगा लाभ

Saroj kanwar
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Tikamgarh News: बुंदेलखंड की बंजर और कम उपजाऊ जमीन अब सुगंधित पौधों की खेती से महक उठेगी। किसानों को लेमनग्रास, रोजग्रास, मोनार्डा, तुलसी और रोज सेंटेड जेरेनियम जैसी विशेष फसलें उगाने के लिए जड़ें निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। इन पौधों की एक बार लगाई गई जड़ें तीन साल तक अच्छी पैदावार देती हैं। किसान प्रति एकड़ लगभग एक से डेढ़ लाख रुपए तक लाभ कमा सकते हैं। इसके बाद नई फसल लगाने के लिए इन्हीं जड़ों को काटकर फिर से उपयोग किया जा सकता है।

खास बात यह है कि इन फसलों को जानवर नहीं खाते, इसलिए नुकसान की संभावना बहुत कम है। जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है, ऐसे में यह वैकल्पिक खेती लाभकारी साबित होगी। कृषि विज्ञान केंद्र और कांटी गांव में इन फसलों के सफल प्रयोग के बाद जिले के किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कृषि विज्ञान केंद्र और अनुसंधान संस्थानों के संयुक्त प्रयास से किसानों को वैज्ञानिक तरीके से सुगंधित फसलों की खेती, प्रसंस्करण और विपणन की जानकारी दी जा रही है। इच्छुक किसानों की सूची तैयार की जा रही है और उन्हें जड़ें निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।एक एकड़ में करीब 15 बोरी जड़ें लगाई जा सकती हैं। मिट्टी की गुणवत्ता के बावजूद फसल उगाई जा सकती है। जड़ों को 2-2 फीट की दूरी पर लगाया जाता है। सात माह के बाद पहली फसल ली जा सकती है और उसके बाद 3-3 माह के अंतराल से तीन साल तक उत्पादन मिलता है।

कृषि विज्ञान केंद्र में तेल निकालने की मशीन भी उपलब्ध है। इस तेल की कीमत 2000 से 2500 रुपए प्रति लीटर है। एक एकड़ से एक बार में 20-25 लीटर तेल प्राप्त किया जा सकता है। यह तेल कॉस्मेटिक, आयुर्वेदिक दवाई, अगरबत्ती, साबुन, डिटर्जेंट और मच्छर मारने वाली वस्तुओं में उपयोग किया जाता है।

इस पहल से बुंदेलखंड के किसान अपनी बंजर भूमि का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और लाभकारी वैकल्पिक खेती से आर्थिक सशक्तिकरण हासिल कर पाएंगे।

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