किसानों की आय होगी दोगुनी, सरकार का बड़ा ऐलान!

Saroj kanwar
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मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना: भारत सरकार ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए सशक्त बनाना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी भूमि की वास्तविक मृदा स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान करना है ताकि वे फसल चयन, उर्वरक उपयोग और मृदा सुधार के संबंध में वैज्ञानिक निर्णय ले सकें। इस योजना के तहत, यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि मृदा स्वास्थ्य फसल उत्पादकता और किसान समृद्धि में योगदान दे।

25 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित

इस योजना के तहत, 25 करोड़ से अधिक किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए हैं। प्रत्येक किसान को यह कार्ड हर दो से तीन साल में जारी किया जाता है। यह कार्ड नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, सल्फर, जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज, बोरॉन, कार्बनिक कार्बन, पीएच स्तर और विद्युत चालकता सहित 12 प्रमुख मृदा मापदंडों की रिपोर्ट करता है। इन सभी तत्वों का विश्लेषण करके किसानों को यह बताया जाता है कि उनकी मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है और कौन सी फसलें उनकी भूमि के लिए सबसे उपयुक्त होंगी।

मृदा परीक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया

मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है। लगभग 15 से 20 सेंटीमीटर गहरे खेत से मिट्टी के नमूने लिए जाते हैं। ये नमूने दो से ढाई हेक्टेयर के ग्रिड क्षेत्र से एकत्र किए जाते हैं। फिर इन्हें राज्य सरकार की मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं, कृषि विश्वविद्यालयों या मान्यता प्राप्त निजी प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है। परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर किसानों को कार्ड जारी किए जाते हैं। किसान soilhealth.dac.gov.in पोर्टल से अपनी रिपोर्ट ऑनलाइन भी डाउनलोड कर सकते हैं।

किसानों के लिए लाभ

इस योजना ने किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। मिट्टी की वास्तविक स्थिति को जानकर, किसान उपयुक्त फसलों का चयन कर सकते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ता है और लागत कम होती है। उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखता है और पर्यावरण पर रासायनिक प्रभाव को भी कम करता है। कार्ड की सिफारिशों का पालन करने से मिट्टी का पीएच स्तर संतुलित रहता है और जैविक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है। इससे किसानों की आय में सीधे तौर पर वृद्धि होती है।

इस योजना ने ग्रामीण रोज़गार को भी बढ़ावा दिया है। सरकार ग्रामीण युवाओं को मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएँ स्थापित करने के लिए 75 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिससे गाँवों में आत्मनिर्भरता और रोज़गार दोनों बढ़ते हैं।

आवेदन प्रक्रिया

किसान इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र, प्रखंड कृषि कार्यालय या ग्राम पंचायत से संपर्क कर सकते हैं। वे soilhealth.dac.gov.in पर ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, पते का प्रमाण और बैंक पासबुक की एक प्रति आवश्यक है। अधिक जानकारी के लिए, किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1551 पर संपर्क कर सकते हैं।

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