करदाताओं के लिए बड़ा बदलाव: आयकर विभाग ने सीपीसी बेंगलुरु को रिफंड पर पूर्ण नियंत्रण दिया

Saroj kanwar
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क्या आप हर साल आईटीआर दाखिल करने के बाद महीनों तक अपने आयकर रिफंड का इंतज़ार करते-करते थक गए हैं? तो यह आपके लिए एक अच्छी खबर है। आयकर विभाग ने रिफंड प्रक्रिया में तेज़ी लाने और अनावश्यक देरी को खत्म करने के लिए बेंगलुरु स्थित सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) को नए और सशक्त अधिकार दिए हैं।

इस अभूतपूर्व बदलाव के साथ, टैक्स क्रेडिट मिसमैच, टीडीएस, एडवांस टैक्स और रिफंड पर ब्याज जैसे सभी मुद्दों का समाधान अब सीधे सीपीसी द्वारा किया जाएगा। विशेषज्ञों का दृढ़ अनुमान है कि इस क्रांतिकारी बदलाव से रिफंड प्रोसेसिंग का समय लगभग आधा हो जाएगा। यह गूगल सर्च-फ्रेंडली सामग्री बताएगी कि यह तकनीकी बदलाव आपकी जेब पर कैसे सीधा असर डालेगा।

सीपीसी बेंगलुरु बना सुपर सेंटर

कई करदाता अभी भी शिकायत करते हैं कि उनके रिफंड अटके हुए हैं या आईटीआर प्रोसेसिंग में देरी हो रही है, जबकि यह प्रणाली काफी हद तक ऑनलाइन और स्वचालित है। इस समस्या की जड़ को समझते हुए, सीबीडीटी (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) ने सीपीसी, बेंगलुरु को अतिरिक्त अधिकार सौंपे हैं।

पुरानी व्यवस्था क्या थी?

पहले, सीपीसी रिटर्न प्रोसेस करता था, लेकिन कई मामलों में, टैक्स क्रेडिट में गड़बड़ी या सुधार के लिए सर्कल असेसिंग ऑफिसर द्वारा सत्यापन या पुष्टि की आवश्यकता होती थी। इस दोहरी व्यवस्था के कारण प्रोसेसिंग और रिफंड दोनों में अनावश्यक देरी होती थी।

नई व्यवस्था

इस अभूतपूर्व नई व्यवस्था के तहत, अब अधिकांश कार्य सीधे सीपीसी द्वारा किए जाएँगे, जिससे किसी अलग अधिकारी द्वारा अनुमोदन की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।

सीपीसी अब कौन से कार्य सीधे संभालेगा?

कर विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि सीपीसी, बेंगलुरु अब कई महत्वपूर्ण और तकनीकी कार्यों को सीधे संभालेगा, जिससे प्रक्रिया में तेजी आएगी। इन कार्यों में शामिल हैं:

धारा 156 के तहत डिमांड नोटिस जारी करना।

टैक्स क्रेडिट बेमेल (जैसे फॉर्म 26AS और ITR के बीच विसंगतियां) से संबंधित समस्याओं का समाधान करना।

अग्रिम कर और टीडीएस से संबंधित त्रुटियों को ठीक करना।

धारा 244A के तहत रिफंड पर देय ब्याज की गणना करना।

गणना से संबंधित कई तकनीकी समस्याओं का समाधान अब एक ही स्थान, यानी सीपीसी पर किया जाएगा। इस एकल-बिंदु प्रबंधन से रिफंड प्रक्रिया में काफी तेजी आएगी।

आपकी जेब पर सीधा असर
हालांकि यह बदलाव पर्दे के पीछे का तकनीकी मामला हो सकता है, लेकिन इसका करदाताओं की जेब पर सीधा और सकारात्मक असर पड़ेगा। चूँकि अनावश्यक हस्तक्षेप की एक परत हट गई है और अब ज़्यादातर काम एक ही केंद्रीकृत स्थान से निपटाए जाएँगे, इसलिए अनुमान है कि रिटर्न प्रोसेसिंग और रिफंड जारी करने में लगने वाला समय लगभग 50 प्रतिशत कम हो जाएगा।

यह उन लाखों करदाताओं के लिए एक बड़ी राहत है जिनका रिफंड लंबे समय से रुका हुआ है। सरल और तेज़ प्रणाली करदाताओं को कागजी कार्रवाई से भी मुक्ति दिलाएगी और उन्हें अपना पैसा तुरंत वापस पाने में मदद करेगी।

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