एनएचएआई हाई-टेक अपडेट 2026: भारत के राजमार्ग नेटवर्क पर यात्रा करने वालों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। अब आपको टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में खड़े होकर बैरियर खुलने का इंतजार करने और समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं है। देश की पहली बैरियर-मुक्त टोल प्रणाली गुजरात के सूरत में सफलतापूर्वक शुरू हो चुकी है।
इस नई प्रणाली के तहत, राजमार्ग पर कोई भौतिक अवरोध या बैरियर नहीं होंगे, जिससे वाहन बिना गति धीमी किए गुजर सकेंगे। यह तकनीक न केवल ईंधन की बचत करेगी बल्कि यात्रा के समय को भी काफी कम करेगी, जिससे राजमार्ग पर यातायात जाम की समस्या का स्थायी समाधान मिलेगा।
यह बाधा रहित तकनीक कैसे काम करती है?
पूरी प्रणाली सड़क के ऊपर लगे गेटों (गैंट्री) पर लगे अत्याधुनिक सेंसर और कैमरों के नेटवर्क पर आधारित है। स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) और उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले कैमरे तेज़ गति से गुजरने वाले वाहनों की लाइसेंस प्लेटों को तुरंत पढ़ लेते हैं। इसके अलावा, इसमें रडार और लिडार आधारित कैमरे भी लगे हैं जो प्रत्येक लेन का 360-डिग्री दृश्य रिकॉर्ड करते हैं।
जैसे ही कोई वाहन इन कैमरों के नीचे से गुजरता है, सिस्टम वाहन की पहचान कर लेता है और सीधे एनएचएआई सर्वर से जुड़ जाता है, जिससे लिंक किए गए फास्टैग या बैंक खाते से टोल अपने आप कट जाता है। दुबई और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की तर्ज पर विकसित यह तकनीक पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी है।