इतिहास से जुड़ा भगवां गांव, आज भी किला और रियासत की यादें संजोए हुए

Saroj kanwar
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Chhatarpur News: छतरपुर जिले से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित भगवां गांव एक ऐतिहासिक जागीर रहा है, जिसकी पहचान यहां मौजूद किला, मंदिर, मकबरे और तालाब से जुड़ी है। करीब 250 साल पहले महाराजा छत्रसाल के पौत्र हेत सिंह उर्फ हटे सिंह ने भगवां जागीर की स्थापना की थी। आजादी के बाद यह क्षेत्र ग्राम पंचायत में बदल गया, लेकिन आज भी यहां रियासत काल के कई अवशेष मौजूद हैं।

भगवां में स्थित किला, जैन मंदिर और पार्शगिरी अतिशय क्षेत्र देशभर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यहां 14 एकड़ में फैला सिद्ध सागर तालाब है, जिसमें मछली पालन, कमल और सिंगाड़ा की खेती होती है। गांव में अंग्रेजी शासन काल का थाना भी रहा है, जो आजादी के बाद करीब 30 साल तक किले में ही संचालित होता रहा।

गांव में हेत सिंह के वंशज अब भी आसपास के कई गांवों में रहते हैं और परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार मकबरे के पास ही होता है। शिक्षा की बात करें तो गांव में चार प्राथमिक स्कूल और एक हायर सेकंडरी स्कूल है, लेकिन कन्या हायर सेकंडरी स्कूल अब तक नहीं खुल पाया है।

उच्च शिक्षा की सुविधा न होने से खासकर लड़कियों को काफी परेशानी होती है।स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी कमजोर है। गांव में एकमात्र प्राथमिक अस्पताल है, लेकिन डॉक्टर की लापरवाही और संसाधनों की कमी से मरीजों को कठिनाई होती है। कृषि, स्वास्थ्य और पंचायत से जुड़े सरकारी भवन भी जर्जर हालत में हैं।

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