आधार अपडेट: UIDAI ने 2.5 करोड़ आधार कार्ड रद्द किए

Saroj kanwar
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आधार कार्ड रद्द: भारत सरकार ने आधार डेटाबेस की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बुधवार को संसद को बताया कि अब तक 2.5 करोड़ से अधिक मृत व्यक्तियों के आधार नंबर निष्क्रिय किए जा चुके हैं। यह कदम दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली की सटीकता बनाए रखने और संभावित धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है।

वर्तमान में, देश में लगभग 1.34 करोड़ सक्रिय आधार कार्ड धारक हैं। मंत्री ने बताया कि मृत व्यक्तियों के आधार कार्डों को निष्क्रिय करना उनकी पहचान के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक है। अक्सर यह देखा गया है कि कल्याणकारी योजनाओं और सरकारी सब्सिडी का लाभ मृत व्यक्तियों के नाम पर अवैध रूप से उठाया जाता है। इस “डेटाबेस शुद्धिकरण” के माध्यम से, सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि लाभ केवल पात्र और जीवित लाभार्थियों तक ही पहुंचे।

संसद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए मंत्री जी ने आधार को और अधिक सुरक्षित बनाने वाले उपायों पर भी प्रकाश डाला। आधार धारक अपने बायोमेट्रिक डेटा को लॉक कर सकते हैं, जिससे उनकी अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का प्रमाणीकरण संभव नहीं होगा।

फेस ऑथेंटिकेशन में अब ‘लाइवनेस चेक’ की सुविधा भी शामिल है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि लेन-देन के समय व्यक्ति शारीरिक रूप से उपस्थित हो, जिससे फोटो या वीडियो के माध्यम से धोखाधड़ी को रोका जा सके। सभी सत्यापन एजेंसियों के लिए आधार डेटा वॉल्ट का उपयोग करना अनिवार्य है, जहां आधार नंबर पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड फॉर्मेट में संग्रहीत होते हैं।
नया आधार ऐप
UIDAI ने एक नया ऐप भी लॉन्च किया है, जिसके ज़रिए ऑफ़लाइन सत्यापन की आवश्यकता वाली संस्थाओं के साथ सुरक्षित रूप से पहचान पत्र साझा किए जा सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आधार डेटाबेस में दर्ज पता और मृत्यु पंजीकरण का स्थान अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए डेटा मिलान सुनिश्चित करने के लिए वह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम कर रही है। UIDAI ने जनसांख्यिकीय विवरणों को अपडेट करने के लिए सख्त दस्तावेज़ीकरण आवश्यकताएं लागू की हैं और नियमित रूप से डेटा की डुप्लीकेट कॉपी हटाती है। यह कदम न केवल सरकारी खजाने से चोरी को रोकेगा, बल्कि डिजिटल इंडिया के तहत पहचान सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक विश्वसनीय बनाएगा।

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