नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही दूसरे देशों के साथ उनके रिश्ते बिगड़ते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ वॉर को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। कभी वह भारत पर टैरिफ बढ़ाने का ऐलान करते हैं तो कभी दूसरे देशों के खिलाफ मोर्चा खोलते हैं। इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ताकतवर व्यापारिक साझेदार चीन पर टैरिफ बम गिरा दिया है।
उन्होंने चीन पर 100% टैरिफ लगाने का ऐलान कर खलबली मचा दी है। इस 100% टैरिफ के तहत वहां बनने वाले अहम सॉफ्टवेयर पर सख्त निर्यात नियंत्रण लगाया जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम से दोनों सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव पैदा हो सकता है। चीन ने भी अमेरिका को इसी तरह की प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। चीन पर लगाए गए ये अतिरिक्त टैरिफ 1 नवंबर, 2025 से लागू होंगे।
ट्रंप ने अहम जानकारी का खुलासा किया
डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, यह फैसला उन खबरों के बाद लिया गया है जिनमें कहा गया था कि चीन अपने लगभग सभी उत्पादों पर व्यापक निर्यात प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है। उन्होंने इसे दूसरे देशों के साथ व्यवहार में नैतिक अपमान बताया। डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, “अभी-अभी पता चला है कि चीन ने व्यापार के मामले में बेहद आक्रामक रुख अपनाया है।
इसका असर बिना किसी अपवाद के सभी देशों पर पड़ेगा, और ज़ाहिर है कि उन्होंने इसकी योजना सालों से बनाई थी। मैं सिर्फ़ अमेरिका की बात कर रहा हूँ, उन देशों की नहीं जिन्हें इसी तरह के खतरों का सामना करना पड़ा है। हम 1 नवंबर से सभी महत्वपूर्ण सॉफ़्टवेयर पर निर्यात नियंत्रण लगा देंगे।” विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह फैसला लागू होता है, तो उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों तक, सभी क्षेत्रों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है, जो पहले से ही मौजूदा टैरिफ के दबाव में हैं।
अमेरिका-चीन तनाव
अमेरिका और चीन के बीच तनाव इस समय चरम पर है। ट्रंप की यह घोषणा एक पूर्व पोस्ट के बाद आई है जिसमें चीनी उत्पादों पर नए टैरिफ लगाने का संकेत दिया गया था।
उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक रद्द करने की धमकी दी। यह बीजिंग पर एक तीखा हमला था, जिससे दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बाज़ार और संबंध तनावपूर्ण हो गए। ट्रंप ने कहा कि शी जिनपिंग से मिलने का कोई कारण नहीं है।