नई दिल्ली: मध्य पूर्व में इस समय भीषण युद्ध छिड़ा हुआ है, जहां अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष नए-नए रूप ले रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के निधन के बाद अरब देशों में अस्थिरता का माहौल है। वहीं, ईरान ने एक कूटनीतिक फैसला लेते हुए सबको चौंका दिया है और कहा है कि वह पड़ोसी देशों पर हमला नहीं करेगा।
दूसरी ओर, अमेरिका अब कोरियाई प्रायद्वीप पर मोर्चा खोल सकता है। इससे अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है। अमेरिका ने सोमवार को दक्षिण कोरिया के साथ “फ्रीडम शील्ड” नामक एक बड़े सैन्य अभ्यास की शुरुआत की, जिसमें हजारों सैनिक हिस्सा लेंगे।
खबरों के मुताबिक, ये अभ्यास आज से शुरू होकर 19 मार्च तक चलेगा। हालांकि, अमेरिकी सेना (यूएसएफके) ने अभी तक अमेरिकी सैनिकों की संख्या की पुष्टि नहीं की है।
रहस्य अभी भी बना हुआ है
मध्य पूर्व में तनाव के बीच, अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच यह संयुक्त सैन्य अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब दक्षिण कोरियाई मीडिया में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि वाशिंगटन ईरान के खिलाफ लड़ाई में उपयोग करने के लिए दक्षिण कोरिया से कुछ सैन्य संसाधन स्थानांतरित कर रहा है।
अमेरिकी सेना कोरिया ने पिछले सप्ताह कहा था कि सुरक्षा कारणों से वह सैन्य संपत्तियों की विशिष्ट गतिविधियों पर टिप्पणी नहीं करेगी। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने भी उन रिपोर्टों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया जिनमें कहा गया था कि कुछ अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल रोधी प्रणालियाँ और अन्य उपकरण मध्य पूर्व भेजे जा रहे हैं।
उत्तर कोरिया ने असंतोष व्यक्त किया
दूसरी ओर, उत्तर कोरिया लगातार फ्रीडम शील्ड अभ्यासों का विरोध करता रहा है। उत्तर कोरिया अक्सर इन अभ्यासों को हमले के रूप में देखता है, जिससे तनाव बढ़ता है।
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने पिछले महीने प्योंगयांग में हुए शिखर सम्मेलन के दौरान सियोल के प्रति अपने कड़े रुख को दोहराया, लेकिन वाशिंगटन के साथ बातचीत के द्वार खुले रखे। उन्होंने अमेरिका से परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्त छोड़ने की मांग की है।
ऐसा लगता है कि अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच काफी समय से संबंध बिगड़ते जा रहे हैं। आशंका है कि आंतरिक कलह की गहरी खाई पनप रही है।