अपनी खाली ज़मीन को सोने की खान में बदलें: पिछवाड़े में मुर्गी पालन शुरू करें और भारी मुनाफ़ा कमाएँ

Saroj kanwar
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मुर्गी पालन व्यवसाय: अगर आपके घर के आस-पास, सामने या पीछे कोई खाली ज़मीन है, तो उसे सोने में बदलने का यह सुनहरा मौका न गँवाएँ। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि घर के पीछे मुर्गी पालन सबसे किफ़ायती और मुनाफ़े वाले व्यवसायों में से एक है। इसके लिए आपको न तो कोई बड़ा पोल्ट्री फ़ार्म बनाना होगा और न ही ज़्यादा मेहनत करनी होगी।

बेरोज़गार युवाओं और किसानों के लिए यह तरीका वरदान साबित हो रहा है। इस लेख में, कृषि विशेषज्ञ डॉ. जगपाल के अनुसार, जानें कड़कनाथ, ग्रामप्रिया और वनराज जैसे ख़ास मुर्गों को पालने का तरीका, कम खर्च में देखभाल और बंपर कमाई का पूरा गणित।
बैकयार्ड पोल्ट्री सबसे ज़्यादा मुनाफ़े वाला व्यवसाय क्यों है
पारंपरिक मुर्गी पालन की तुलना में, बैकयार्ड पोल्ट्री कई मायनों में बेहतर है। माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगपाल बताते हैं कि इसमें कम रखरखाव की आवश्यकता होती है और आप खुले वातावरण में मुर्गियाँ पाल सकते हैं।

इस विधि से आप कड़कनाथ, ग्रामप्रिय, स्वर्णनाथ, वनराज, सोनाली, देसी देहाती और कारी जैसी उत्कृष्ट देशी नस्लों का पालन कर सकते हैं। इन नस्लों की बाज़ार में काफ़ी माँग है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र और राज्य सरकारें इन मुर्गियों को पालने के लिए कई तरह की सब्सिडी भी देती हैं, जिससे आपका शुरुआती निवेश और भी कम हो जाता है।
चारे की चिंता दूर और दोहरी सुरक्षा
बाहरी मुर्गी पालन का सबसे बड़ा आर्थिक लाभ है, चारे की कम लागत। पिछवाड़े में पलने वाले मुर्गियों को अतिरिक्त चारे की ज़रूरत नहीं होती क्योंकि वे बाहर चरते हैं। फसल अवशेषों पर निर्भर रहने के कारण उनका भोजन सेवन आधा हो जाता है। अगर चारे की ज़रूरत भी हो, तो प्रत्येक मुर्गे को प्रतिदिन केवल 45-50 ग्राम चारे की आवश्यकता होती है। ये मुर्गियाँ न केवल भोजन खाती हैं, बल्कि फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीटों को भी नष्ट करती हैं। इस तरह, ये न केवल किसानों को पोषण प्रदान करती हैं, बल्कि फसलों को नुकसान से भी बचाती हैं।

त्वरित लाभ और कड़कनाथ का जादू
पिछवाड़े में मुर्गी पालन में मुर्गियाँ जल्दी परिपक्व होती हैं, जिससे उन्हें जल्दी लाभ मिलता है। जहाँ स्थानीय मुर्गियों को परिपक्व होने में 7 से 8 महीने लगते हैं, वहीं ये विशेष नस्लें केवल 4-5 महीनों में एक से डेढ़ किलोग्राम वजन तक पहुँच सकती हैं।

इससे उत्पादन चक्र में तेज़ी आती है। अगर किसान कड़कनाथ नस्ल का पालन करते हैं, तो बाज़ार में एक मुर्गी आसानी से ₹700 से ₹1000 प्रति किलोग्राम बिक जाती है। इस प्रकार, अगर आप बड़ी संख्या में मुर्गियाँ पालते हैं, तो हर साल अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं। इसके अलावा, अंडे बेचकर भी आपको नियमित आय होगी।

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