Movie prime

बकरी पालन के लिए इन तीन नस्लों को मिली राष्ट्रीय पहचान

 

ग्रामीण इलाकों में लोग बकरी पालन करके काफी अच्छा पैसा कमा रहे हैं मार्केट में बकरी के दूध और मांस की बढ़ती मांग के कारण आज बकरी पालन एक बड़े बिजनेस के रूप में उभरा है। बकरी पालन बिजनेस के लिए सरकार से भी लोन और सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाता है।  बकरी पालन का बिजनेस शुरू करने से पहले हमें बकरियों की नस्ल के बारे में जानकारी होना जरूरी है कि बिजनेस में माल के रूप में हमारे पास बकरियां होती है यह बिजनेस बकरियों की नस्ल पर निर्भर करता है यदि बकरियों की उन्नत फसलों का चयन किया जाए जिससे अधिक लाभ होता है। 

हाल ही में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के वैज्ञानिकों ने बकरी की नई नस्लों की पहचान की है और इसका पंजीयन राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो करनाल के अंतर्गत करवाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर की वैज्ञानिकों द्वारा बकरी की नस्ल की पहचान की गई है उनमें राजस्थान की सोजत ,गुजरी, करौली बकरी की पहचान की गई है। बकरी पालन के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के अधीनस्थ उत्पादन विभाग ने महत्वपूर्ण कार्य किया है इसी के साथ बकरी पालन की इन तीन नई नस्लों को राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण भी करवाया है। यह तीनों नस्ले राजस्थान के अलग-अलग जिलों में पाई जाती है।  नस्लों के पंजीयन के बाद विश्वविद्यालय आधिकारिक रूप से इन  बकरियों  शुद्ध पंचकर्म पर कार्य कर पाएगा जिससे प्रदेश की बकरी पालकों कोई नस्लों के शुद्ध पशु प्राप्त हो सकेंगे जो बकरी पालन क्षेत्र को एक नई पहचान दिलाएंगे। 

1 बकरी पालन के लिए नई सोजत बकरी :

बकरी की सोजत नस्ल उत्तर पश्चिमी शुष्क एवं क्षेत्र में पाई जाने वाली नस्ल है इसका उद्गम स्थल सोजत और उसके आसपास का क्षेत्र का है इस नस्ल का मूल क्षेत्र पाली जिले की सोजत और पाली तहसील जोधपुर जिले के बिलाड़ा हो तथा पीपाड़ तहसील है। सोजत नस्ल राजस्थान की अन्य मौजूद नस्लों  से काफी अलग है इस नस्ल  में कई तरह की विशेषताएं होती है।  इस नस्ल की बकरी गुलाबी रंग की होती है और कान लंबे होते हैं ,इस नस्ल की बकरी का आकार मध्यम होता है और इसके शरीर पर सफेद रंग में भूरे धब्बे होते हैं।इसके कान लंबे और लटके हुए होते हैं और इसके ऊपर की ओर मुड़े हुए होते हैं यह नस्ल मुख्य रूप से मांस के लिए पाली जाती है इसका दुग्ध उत्पादन कम होता है। 

2 बकरी पालन के लिए नई नस्ल गुजरी बकरी 

बकरी की नस्ल गुजरी राजस्थान के अर्द्धशुष्क पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में पायी जाती है। इस  नस्ल की बकरियों को जयपुर ,अजमेर रोड ,टोंक जिलों और नागौर से सीकर जिले के कुछ हिस्सों में देखा जा सकता है।  इस नस्ल की बकरी को दूध और मांस के लिए पाला जाता है। इस नस्ल में भी कई विशेषताएं होती है जो इस नस्ल  की बकरियों को अन्य  नस्ल से अलग पहचान देती है इस नस्ल का मूल क्षेत्र नागौर जिले की कुचामन और नावा तहसील है। गूजरी बकरी की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार से हैं। गुजरी बकरी अन्य नस्लों की तुलना में आकार में बड़ी होती है इस नस्ल की बकरी का रंग मिश्रित सफेद  भूरा होता है इस बकरी का सफेद रंग का चेहरा, पैर, पेट और पूरे शरीर पर भूरे रंग के धब्बे होते हैं जिससे यह दूसरी नस्लों से भिन्न नजर आती है। इस नस्ल  को मांस  के लिए पाला  जाता है। इस नस्ल का दूध उत्पादन अधिक होता है। 

बकरी पालन के लिए करौली बकरी 


इस नस्ल की बकरी राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी आद्र मैदानी इलाको  में होती है। यह इस क्षेत्र की स्वदेशी नस्ल है इस नस्ल का मूल क्षेत्र करौली जिले के सपोटरा मंडल तथा हिंडोल तहसीलें हैं यह नस्ल करौली ,सवाई माधोपुर,कोटा, बूंदी और 12 जिलों तक फैली हुई है इस नस्ल की बकरी के तौर पर भूरे रंग की पट्टियों  के साथ  बकरी के रंग का पैटर्न काला है। की बकरी के कानों की सीमा पर भूरे रंग का  रेखाओ से मुड़े होते हैं और उसकी नाक रोमन होती है।