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धान की खेती में अजोला की खेती बढ़ा देगी पैदावार और मिटटी की उर्वरकता ,यहां जाने कैसे होती है
 

इस समय खरीफ की फसलों की बुवाई का सीजन शुरू हो गया है खरीफ सीजन में उगाई जाने वाली फसलों में धान का एक अपना महत्वपूर्ण स्थान है कई राज्य में धान की खेती प्रमुखता से की जाती है यदि धान की खेती में यदि अजोला की खेती की जाए तो किसानों को लाभ हो सकता है धान के लिए अजोला  किसी वरदान से कम नहीं है   अजोला  में पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन होता है जो धान में उर्वरकता को बढ़ाता है   यह धान में रासायनिक खाद की कमी को पूरा करते हैं जिससे धान की खेती में रासायनिक खाद का इस्तेमाल कम करना पड़ता है और लागत भी कम आता है। 

इसके अलावा  अजोला  पशुओ के चारे के लिए भी एक अच्छा स्रोत है इसे खाने से पशुओं का दूध भी बढ़ता है आज हम आपको अजोला की खेती के बारे में बताते हैं दरअसल अजोला   एक जलीय फर्न  है जो समशीतोष्ण जलवायु में पाया जाता है यह धान की खेती के लिए उपयोगी होता है फर्न  पानी पर हरे रंग की परत जैसा दिखता है इस फर्न  के निचले भाग में सिम्बोइंट के रूप में ब्लू ग्रीन एल्गी सयानोबैक्टीरिया पाया जाता है जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को परिवर्तित करता है इसकी नाइट्रोजन को परिवर्तित करने की दर करीब 25 किलोग्राम प्रति हेक्टर होती है आपको बता दें कि नाइट्रोजन मिट्टी की सेहत के लिए काफी गुणकारी होती है इसलिए अजोला की खेती से धान की फसल और खेत की भूमि  दोनों को फायदादेता  है। 

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हरी खाद के रूप में अजोला को पानी से भरे हुए खेत में 2 से 3 सप्ताह के लिए अकेले उगाया जाता है बाद में पानी बाहर निकाल दिया जाता है और अजोला फर्न को धान की रोपाई से पहले खेत में मिलाया जाता है या धान की रोपाई के एक हफ्ते बाद पानी से भरे खेत में 4 क्विंटल ताजा अजोला  छिड़क दिया जाता है इससे धान में रासायनिक खाद की आवश्यकता कम पड़ती है और उत्पादन ज्यादा होता है आपको बता दे की  अजोला  वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन को क्रमशः कार्बोहाइड्रेट और अमोनिया में बदल सकता है और अपघठ्न  के बाद फसल को नाइट्रोजन उपलब्ध करवाता है तथा मिट्टी में जैविक कार्बन सामग्री उपलब्ध करवाता है जो मिट्टी की सेहत के लिए काफी जरूरी होता है। 

 इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन इसे खरीफ और रबी दोनों मौसमों में हरी खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है अजोला से बनी हरी खाद मिट्टी को सेहत में सुधार करती है इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है जिससे पैदावार ज्यादा होती है धान के खेत में अजोला छोटी मोटी खरपतवार जैसे चारों और नटेला को भी दबा देता है यह धान के सिंचित  खेत में वाष्पीकरण की दर को कम करता है या रासायनिक उर्वरकों के उपयोग की क्षमता को बढ़ाता है इसकी खेती के लिए पीएस तापमान 5. 5 के बीच 7होना चाहिए अच्छी उपज के लिए संक्रमण से मुक्त वातावरण रखना जरूरी है अच्छी विकास के लिए इसे नियमित रूप से काटना चाहिए।