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सर्वपितृ अमावस्या पर सदियों से चली आ रही है इस परम्परा का है ये महत्व ,यहां जाने कैसे होंगे सभी दुःख दूर
 

पितृ  पक्ष की अमावस्या 25 सितंबर को है इसके बाद 26 तारीख से नवरात्र की शुरू हो जाएगी अभी अश्विन मास चल रहा है उस महीने का कृष्ण कृष्ण पक्ष यानी कि शुरू की 15 तिथियां पितरो  को समर्पित होती है इन दिनों में पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण ,धूप ,ध्यान और श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है पितृपक्ष का समापन सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर होता है आज हम आपको सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या से जुड़ी कुछ बातें बताते हैं। 

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1 साल में कुल 12 अमावस्या होती है जब किसी साल में अधिकमास  रहता है तो इनकी संख्या 13 हो जाती अमावस्या पर हिंदी महीने  कृष्ण पक्ष आधा महीना खत्म होता है अमावस्या को भी पर्व की तरह माना जाता है इसलिए देश भर की सभी पवित्र नदियों में स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं कहते हैं कि इसमें  स्नान करने से फल मिलता है और जाने अनजाने में किए गए पाप कर्मों का फल खत्म होता है। 

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नदी में स्नान के बाद नदी के जल से ही सूर्य को अर्ध्य अर्पित करना चाहिए सूर्य को अर्ध्य अर्पित करते समय ओम सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें पितृ   पक्ष की अमावस्या पर पितरों के लिए नदी किनारे पिंडदान ,तर्पण और धूप दान करने का विशेष महत्व है अगर नदी किनारे आप श्राद्ध नहीं कर पा रहे हैं तो अपने घर पर ही धूप दान करें इसके लिए जलते हुए कंधे पर गुड़ अर्पित करना चाहिए। 

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हथेली में जल लेकर अंगूठी की ओर से पितरों को जल अर्पित करना चाहिए इस दिन किसी मंदिर में शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल जरूर चढ़ाना  चाहिए  चांदी के लोटे से दूध चढ़ाएं और सभी तरह की पूजन सामग्री अर्पित करें रविवार को अमावस्या होने से इसका महत्व और बढ़ जाता है इस दिन सूर्य देव के लिए भी दान पूर्ण करना चाहिए सूर्य की चीजें जैसे गुड , तांबा ,लाल वस्त्र दान करें।