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Pitru Paksha 2022:यहां जाने श्राद्ध में किन फूलो के प्रयोग से पित्तर होते है प्र्शन्न और किन फूलो से होते है निराश
 

पितृपक्ष पितरों को प्रसन्न कर उनको आशीर्वाद पाने का विशेष पक्ष है जिससे पितरों का पूजन तर्पण में भोजन का विशेष महत्व है पर बहुत ही कम लोग जानते हैं कि पितरों की पूजा में हर किसी फूल का प्रयोग नहीं होता शास्त्रों में कुछ विशेष फूलों को ही पितरों की पूजा में उपयोग लाने का विधान बताया गया है आज हम आपको उन फूलों के बारे में बताते हैं जो श्राद्ध कर्म में उपयोगी योग्य है साथ ही उन फूलों में कुछ के बारे में भी बताएंगे। 

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श्राद्ध में वर्जित ज्योतिष के अनुसार श्राद्ध की पूजा अन्य पूजा से थोड़ी अलग होती है इसलिए इसमें हर किसी फूल का प्रयोग नहीं होता श्राद्ध पूजन में कमल ,मालती ,जूही व चंपा के फूलों के अलावा सभी सुगंधित फूलों का प्रयोग किया जा सकता है तुलसी और भृंगराज भी श्राद्ध में ग्रहण करने योग्य फूल माने गए हैं। 

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श्राद्ध में कभी भी कदम ,केवड़ा ,मौलश्री ,बेलपत्र ,करवीर ,लाल तथा काले रंग के फूल ने वअधिक गंध वाले फूलों की इस्तेमाल ना करें शास्त्रों के अनुसार पितृ  इन्हें देखकर निराश होकर लौट जाते हैं मृत्यु पुराण में पद्मादि को भी वर्जित बताया गया है, पर हेमाद्रि ने इसको स्थलजात फूल गुलाब कहा है क्योंकि अन्य सभी जगह कमल को श्राद्ध कर्म में बड़ा प्रशंसनीय बताया गया है बताया गया हैपुराणों के अनुसार श्राद्ध कर्म में पलाश के पेड़ को भी निषेध  माना गया है क्योंकि इसका उपयोग यज्ञ कार्य में होता है इसलिए आसन, शयन, सवारी, खड़ाऊं, दातुन व पाद- पीठ के लिए उनका प्रयोग नहीं किया जाता है। 

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 श्राद्ध में कुस का काफी महत्व है इस संबंध में ध्यान रखने योग्य बात यह है कि बिना फूल का कुश दर्भ और मूल सहित कुश कुतप कहलाता है. केवल फूल वाला कुश ही वास्तव में कुश कहलाता है, जिसका उपयोग ही श्राद्ध में करना चाहिए।