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Pitra Paksha 2022: पितृ ऋण से मुक्ति पाने के लिए यहाँ करे श्राद्ध और पिंडदान
 

पितृ पक्ष में पितरों का स्मरण किया जाता है। उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। पितृ पक्ष में पितरों द्वारा किए गए कार्यों का भी स्मरण किया जाता है। पितृ पक्ष में पितरों का स्मरण करने से विघ्नों का नाश होता है। जीवन में परेशानियां आती हैं और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। लेकिन यह पूरी तरह तभी संभव है जब इन बातों का पता चले।शास्त्रों के अनुसार सनातन धर्म में ब्रह्मयज्ञ, पितृ यज्ञ, देव यज्ञ, भूत यज्ञ और मनुषयज्ञ को बताया गया है

ऐसा माना जाता है कि ये 5 प्रकार के यज्ञ मनुष्य के लिए आवश्यक हैं। इसके साथ मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण भी बताए गए हैं। जिन्हें उतारने की जरूरत है।पौराणिक कथा के अनुसार गयासुर नामक असुर ने भगवन ब्रह्मा को यज्ञ के लिए अपना शरीर दिया था। इसके फलस्वरूप में गयासुर नामक असुर के मुंह वाले हिस्से पर बिहार का गया पितृ तीर्थ, नाभि वाले हिस्से पर जाजपुर का पितृ तीर्थ और गयासुर के पैर वाले हिस्से पर राजमुंदरी का पीठापुरम पितृ तीर्थ है।

'गया' पितृ तीर्थ को लेकर कहा जाता है कि गयासुर नाम एक असुर था। ये असुर होकर भी लोगों की भलाई  करता था, और यज्ञ में भाग लिया करता था । कहा जाता हैं कि इस राक्षस ने भगवन ब्रह्मा के कहने पर अपना शरीर यज्ञ के लिए दिया। एक मान्यता के अनुसार भगवन  ब्रह्मा जी ने सबसे पहले गया को श्रेष्ठ तीर्थ मानकर यज्ञ किया था। पौराणिक मान्यता के अनुसार ओडिशा का जाजपुर नाभि गया क्षेत्र कहा गया है।

पौराणिक कथा के अनुसार भगवन ब्रह्मा जी के कहने पर गयासुर ने यज्ञ के लिए जब अपना शरीर दिया था तो इसी जगह पर उसकी नाभि थी। इस स्थान को भी श्राद्ध और तर्पण के लिए माना जाता है।  पिथापुरम आंध्र प्रदेश में स्थित है। इस पीठापुरम को पिष्टपुर भी कहा जाता है। गयासुर का पांव पीठापुरम में ही था जब बलि के लिए शव दिया गया था। इसलिए इसे पद गया के नाम से भी जाना जाता है। पिथापुरम त्रिगया क्षेत्रों में से एक है। इसकी खास पहचान है।