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इस दिन से शुरू हो रहे है शरदीय नवरात्रि ,यहां जाने कलश स्थापना पूजा का शुभ महूर्त
 

हिंदू धर्म में चैत्र और अश्विन  नवरात्रा की काफी महत्व है मगर साल भर में 4 नवरात्रि शारदीय नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है इस दौरान माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है कहते हैं जो इस दौरान माता के भक्तों से सभी  कष्ट  दूर होते हैं सभी जानते हैं कि भारत के सभी राज्यों में नवरात्रि का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। 

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नवरात्रि के पहले दिन कलश की स्थापना होती है ऐसे में नवरात्रि को पहले दिन को घटस्थापना भी कहते हैं आज हम आपको बताते हैं कि इस बार शारदीय नवरात्र कब से शुरू हो रही है और तिथि ,शुभ मुहूर्त ,घट स्थापना का पूरा मुहूर्त बताते हैं। 
आश्विन नवरात्रि सोमवार, 26 सितंबर, 2022
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ- 26 सितंबर, 2022 को सुबह 3 बजकर 23 मिनट से शुरू हो रहा है.
प्रतिपदा तिथि समाप्त- 27 सितंबर, 2022 को सुबह 3 बजकर 8 मिनट पर खत्म हो रहा है.
नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त
आश्विन घटस्थापना सोमवार, 26 सितम्बर, 2022 को
घटस्थापना मुहूर्त- पहले दिन सुबह 6 बजकर 28 मिनट से लेकर 8 बजकर 1 मिनट तक रहेगा.
जानें अवधि- 1 घंटा 33 मिनट
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त - शाम 12 बजकर 6 मिनट से शाम 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा.
जानें अवधि- 00 घंटे 48 मिनट
कन्या लग्न प्रारंभ- 26 सितंबर, 2022 सुबह 6 बजकर 28 मिनट से शुरू होगा.
कन्या लग्न समाप्त- 26 सितंबर, 2022 को सुबह 8 बजकर 1 मिनट पर खत्म होगा.
नवरात्रि पर बनने वाले शुभ योग
विजय मुहूर्त- शाम 2 बजकर 30 मिनट से शाम 3 बजकर 18 मिनट तक रहेगा.
निशिता मुहूर्त- 27 सितंबर सुबह 12 बजकर 6 मिनट से लेकर सितंबर 27, सुबह 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा.

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ज्योतिष के अनुसार घटस्थापना नवरात्रि के महत्वपूर्ण स्थानों में से एक माना जाता है यह नया दिनों के उत्सव की शुरुआत का प्रतीक होता है पौराणिक कथाओं के अनुसार नवरात्रि में एक निश्चित समय के दौरान घट स्थापना करने के लिए कुछ खास नहीं मुंह के बारे में बताया गया है और सही समय में घट स्थापना करना बहुत जरूरी माना गया है कहते हैं कि इस समय में घट स्थापना ना की जाए तो मां का प्रकोप का सामना करना पड़ता है   अमावस्या और रात के समय गलती से भी घटस्थापना  ना करे। 

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 शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा का आह्वान करने से पहले  कलश  की तैयारी होती है इसके बाद अनाज बोन के लिए पहले मिट्टी का चौड़ा बर्तन ले फिर इसने मिट्टी की पहली परत को अच्छी तरह से फैला दें इसके बाद इसे अनाज डाले और इसमें मिट्टी की दूसरी परत फैलाएं इसके बाद इसमें अनाज की दूसरी परत को फैला दें या मिट्टी की तीसरी परत और आखरी परत को बर्तन में फैला दें इस पूरी प्रक्रिया के बाद कलश  पर कलावा बांधकर इसके ऊपर गंगा जल भर दे  पानी में सुपारी ,इत्र ,दुर्वा ,घास ,अक्षत और सिक्के डालें कलश  को ढकने से पहले अशोक के  5 पत्तों को कलश  के किनारे पर रख दे और इसके बाद नारियल लें और लाल कपड़े में लपेट लें और इस पर कलावा लपेट दें नारियल को कलश के ऊपर रख दे  माता के सामने दीपक जलाएं फल अर्पित करें और आखिर में माता की आरती करे।