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अकबर के खाने में क्यों नहीं होता था आलू ,मिर्च ,टमाटर का उपयोग ,यहां जाने केसा था उनका भोजन
 

कहा जाता है कि मुगलों को गोश्त काफी पसंद था लेकिन इतिहास के पन्नो पर नजर डालें तो यह बात पूरी तरह से सच नहीं है। मुगल बादशाह अकबर से लेकर औरंगजेब तक को सब्जियों और साग काफी पसंद थे  अकबर के लिए गोश्त सिर्फ शरीर को मजबूत रखने के लिए एक खानपान था उसके लिए गोश्त पकाने और उसे पेश करने का भी अलग ही तरीका था। अकबर के दस्तरखान में तरह-तरह के व्यंजन देखने को मिलते थे लेकिन वह दिन में केवल एक बार ही खाना खाते थे और उसके लिए भी कोई सीमा तय नहीं थी। 

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 बादशाह के सामने जब  खाना परोसा जाता था तो उसमें कई तरह के जायके शामिल होते थे

खाद्य इतिहासकार सलमा हुसैन के अनुसार , मुगल बादशाह क्या खाएंगे और क्या नहीं यह तय करने का काम सल्तनत की शाही हकीम  किया करते थे  बादशाह के सामने जब  खाना परोसा जाता था तो उसमें कई तरह के जायके शामिल होते थे वे लिखती है की अकबर के   खाने में जो गोश्त पेश किया जाता है उसे खास तरह से तैयार किया जाता था उसे पकाने के लिए पहले गोश्त को आटे में लपेटा जाता था फिर जमीन के नीचे धीमी धीमी गर्माहट के साथ पकाया जाता था उस व्यंजन को 'मुर्ग जमींदोज 'कहा जाता था इसके साथ ही दही और 30 तरिके के अचार और चटनी पेश की जाती थी जिनमें खासतौर पर अदरक , दालचीनी, जीरा ,लौंग, काली मिर्च ,इलायची और केसर का प्रयोग होता था। अकबर के  नवरत्न रहे अबुल फजल ने अपनी किताब 'आईने अकबरी ' में लिखा है अकबर के खाने में आलू। टमाट।  लाल मिर्च नहीं होते थे , ऐसा इसलिए था क्योंकि उत्तर भारत के उस दौर में इनकी पहुंच नहीं थी। 

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शाही बावर्ची खाने में सरसों ,तिल के दाने ,कढ़ी पत्ता  और कलौंजी का भी इस्तेमाल नहीं होता था

इतना ही नहीं शाही बावर्ची खाने में सरसों ,तिल के दाने ,कढ़ी पत्ता  और कलौंजी का भी इस्तेमाल नहीं होता था। मुगलों में फलों को लेकर काफी आकर्षण रहता था आप औरंगजेब को आम  काफी पसंद थे और अकबर  को खरबूजे ,यही वजह है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से उनके लिए खरबूजे मंगवाए  मंगवाए जाते थे अकबर का आदेश था कि शाही बावर्ची खाने में जो भी उनके लिए  भोजन तैयार हो उनमें से कुछ हिस्सा गरीबों को भी बंटवाया  जाए। इतिहासकारों का कहना है कि अकबर के लिए हर साल करीब 1000 जोड़ी कपड़े सिलवाए जाते थे वह भी सिल्क के ,उन कपड़ों को बादशाह की जरूरत से पहले ही सिलवा लिया जाता था जिसमें सोने के तारों की कढ़ाई देखने को मिलती थी। 

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अकबर की सल्तनत में सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए राजस्व भी माफ कर दिए गए थे

अबुल फजल ने अपनी किताब में लिखा है कि ,बादशाह को दाल ,मौसमी सब्जियों और पुलाव काफी पसंद थी उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए शाही रसोई उनके खाने में सब्जियों से अलग-अलग तरह के पकवान बनाते थे इसी कारण अकबर की सल्तनत में सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए राजस्व भी माफ कर दिए गए थे अकबर के जन्मदिन के मौके पर भव्य आयोजन होता था उन्हें घी , मिठाई ,सोने और कपड़े से तोला जाता था तोड़ने के बाद उन चीजों को गरीबों में बांट दिया जाता था।