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ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू हुआ आज से ,यहां जाने 25 मई से 31 मई तक है कोनसे बड़े त्यौहार

 

हिंदी पंचांग का तीसरा महीना जेष्ठ मास चल रहा है और इस मास  का एक पक्ष  खत्म हो गया।  जेष्ठ शुक्ल पक्ष की शुरुआत 20 मई से हो गई है। यह महीना हमें पानी बचाने का संदेश देता है क्योंकि इन दिनों गर्मी काफी अधिक रहती है। पानी की अधिकता स्रोत सूख जाते हैं।  ऐसे में पानी की बूंद बूंद में बचाने चाहिए । ज्योतिष के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष के व्रत उपवास में जल का महत्व समझाते हैं । एक पक्ष में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी आती है जेष्ठ मास के दूसरे पक्ष में नौतपा 25 मई से शुरू होगा और 3 जून तक रहेगा। ज्येष्ठ  पूर्णिमा तक कौन-कौन से एक खास त्यौहार होंगे।

  तीज पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र  सेहत और सौभाग्य के लिए व्रत रखती है

22 मई को जेष्ठ शुक्ल की तृतीया तिथि को रम्भा तीज  कहते हैं। इस तीज पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र  सेहत और सौभाग्य के लिए व्रत रखती है। शिव पार्वती की पूजा करती है। मान्यता है कि रम्भा ने भी यह व्रत किया था इस कारण इस तिथि को रम्भा  तीज कहते हैं। 23 मई को अंगारक विनायक चतुर्थी है जब चतुर्थी मंगलवार को होती है तो उसका महत्व और अधिक बढ़ जाता ह।  इस तिथि पर महिलाएं गणेश जी के लिए व्रत करती है। 

नौतपा में सूर्य अपने पूरे प्रभाव में होता ह

 25 मई से नौतपा शुरू हो रहा है जो कि 3 जून तक रहेगा। नौतपा में सूर्य अपने पूरे प्रभाव में होता ह।  गर्मी अधिक रहती है ऐसे में हमें सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए।  खान पान में ऐसी चीजों का सेवन करें जिनसे शरीर को ठंडक मिल सके। ऐसे कपड़े पहने जिनकी वजह से ज्यादा गर्मी ना लगे सीधे धूप में ज्यादा देर तक खड़े ना रहे। 30 मई को गंगा दशहरा है इस दिन देव नदी गंगा की विशेष पूजा होती है   इस दिन  गंगा नदी में स्नान करते हैं और स्नान के बाद नदी किनारे   दान पुण्य करते हैं।। 31 मई को साल की सबसे बड़ी एकादशी निर्जला एकादशी है। इस एकादशी का महत्व सबसे अधिक है। मान्यता है कि इस एक दिन के व्रत से सालभर की सभी एकादशियों के व्रत से मिलने वाले पुण्य के बराबर पुण्य मिल जाता है। निर्जला एकादशी निर्जल यानी बिना पानी के किया जाता है। व्रत करने वाले लोग पूरे दिन पानी भी नहीं पीते हैं। गर्मी के दिनों में ऐसा व्रत करना एक तपस्या की तरह है।

3 जून को नवतपा खत्म हो जाएगा। इस दिन पूर्णिमा का व्रत किया जाएगा। ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा दो दिन रहेगी। 4 जून को भी पूर्णिमा होने से इस दिन नदी स्नान और दान-पुण्य किया जाएगा। 4 जून को संत कबीर की जयंती मनाई जाएगी।