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पितृ पक्ष में कौए को क्यों खिलाया जाता है खाना ,ये है इसकी पौराणिक कथा
 

10 अगस्त से पितृ पक्ष की शुरुआत हो गई है इस साल पितृपक्ष 10 सितंबर से लेकर 25 सितंबर तक चलेगा पितृपक्ष में पितरों की आत्मा तृप्ति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं पितरों की तिथि के दिन श्राद्ध किया जाता है और पितरों की पसंद का भोजन भी बनाया जाता है इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं और दान दक्षिणा भी देते हैं इस दिन  लोग एक और काम करते हैं कि भोजन का एक हिस्सा निकालकर कौए को खिलाया जाता है इसका भी अपना एक महत्व है जिसके बारे में आज हम आपको बताते हैं। 

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 पितृपक्ष के समय में या फिर अमावस्या को किसी की श्राद्ध कर्म को आपने देखा होगा कि भोजन का कुछ अंश कौवे  को खिलाया जाता है इससे जुड़ी मान्यता है  यदि कौआ उस भोजन के अंश को ग्रहण कर लेता है तो आपके  पितर तृप्त हो जाते हैं कहा जाता है यह है की कौए को दिया  गया भोजन सीधे पितरों को मिलता है। 

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धार्मिक मान्यता के अनुसार जब भी किसी व्यक्ति की मौत होती है तो उसका कौए  योनि में जन्म होता है इस वजह से माना जाता है कि कौवे  के माध्यम से भोजन पितरों तक पहुंचता है यदि आप का दिया हुआ भोजन कौआ  खाता है तो इसका अर्थ है कि आपके पित्तर आपसे  संतुष्ट और प्रसन्न नहीं है वही  श्राद्ध का भोजन केवल कौए को  ही नहीं गाय।, कुत्ता और पक्षियों को भी दिया  जाता है यदि  ये भोजन स्वीकार नहीं होता है इसे पितरों की नाराजगी का संकेत माना जाता है। 

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वही पुरानी कथा के अनुसार त्रेता युग में इंद्र देव के पुत्र जयंत ने कौए का रूप धारण किया था उसने  एक दिन सीता जी के पैर में चोट मार दिया ये घटना रामजी ने देख ली उन्होंने 1 तिनका  चलाया तो ये तिनका कौए  आंख में लग गया और उसकी एक आंख खराब हो गई इंद्र पुत्र ने  श्री राम जी से अपनी गलती की माफी मांगी और क्षमा  याचना की इस प्रभु राम प्रसन्न है और उसे आशीर्वाद दिया पितृपक्ष के दौरान को दिया गया भोजन का अंश  पितृ लोक में निवास करने वाले पितरों को प्राप्त हो इसी वजह से पितृपक्ष में कौए को  भोजन दिया जाता है।