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दुनिया में है बस है ये एक कुंड जहा होती है भटकती हुयी आत्माओ की मुक्ति
 

पितरों का तर्पण के पर्व पितृ पक्ष की शुरुआत 10 सितंबर से हो गई है मोक्ष की नगरी काशी में 15 दिनों तक घाट और गुंडों पर लोग तर्पण और पिंडदान के लिए बड़ी संख्या में आते हैं मोक्ष के इस  शहर में  एक ऐसा कुंड है जो  भटकती हुई आत्मा उनकी मुक्ति के लिए खास अनुष्ठान करता है। 

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पितृपक्ष के अलावा यहां आम दिनों में भी काफी भीड़ होती है काशी  के पिशाच मोचन कुंड को  लेकर यह मान्यता है कि इस कुंड पर तर्पण और श्राद्ध करने से भटकती आत्माओं को भी मुक्ति मिलती है यही वजह है कि यहां बड़ी संख्या में देशभर से श्रद्धालु पूजन के लिए आते हैं इस कुंड पर भटकती आत्माओं की शांति के लिए नारायण बलि और  त्रिपंडी करवाया जाता है पूरी दुनिया में केवल काशी में ही पिशाच मोचन कुंड स्थित है जहां यह अनुष्ठान होता है। 

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यहां के आचार्य महेंद्र तिवारी ने बताया कि  तामसी, राजसी और सात्विक ये तीन तरह की आत्माएं होती हैं इनकी आत्माओं को मुक्ति दिलाने के लिए यहां पर अनुष्ठान होता है इसे नारायण बलि या त्रिपंडी कहते हैं  इसमें तीन अलग-अलग कलश पर भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शंकर की पूरे विधान से पूजा की जाती हैभटकती आत्माओं को मुक्ति का मार्ग मिल जाता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सिर्फ काशी के पिशाच मोचन कुंड पर त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाता है। 

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 कहते हैं कि पितृपक्ष में पितरों के लिए बैकुंठ का द्वार खुल जाता है इससे जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि भगवान शंकर ने खुद यहां पर यह वरदान दिया था कि जो अपने पितरों का श्राद्ध कर्म इस कुंड पर करेगा उसे सभी योनि से मुक्ति मिल जाएगी।