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जानिये क्यों गंगा जल को माना जाता है पवित्र ?
 

हिंदू धर्म में गंगा जल को सबसे ज्यादा पवित्र माना जाता है। सभी प्रकार की पूजा एवं शुभ कार्य में गंगा जल का उपयोग किया जाता है। ग्रंथों में गंगा को देव नदी भी कहा गया है।विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में गंगा जल का उपयोग भी किया जाता है। गंगाजल को केवल हिंदू धर्म ही नहीं बल्कि साइंस में भी सबसे पवित्र माना जाता है।गंगा जल का महत्तव सृष्टि के संचार से ही अद्भुत रहा है।

गंगा नदी भगवन शिव की जटाओ से निकलती है।गंगा नदी भारत के कई देशो से निकलती है जैसे की उत्तराखंड,उत्तेर प्रदेश , मध्य प्रदेश , राजस्थान , हरयाणा , हिमाचल प्रदेश , छत्तीसगर्ह , हिमाचल प्रदेश ,छत्तीसगर्ह , बिहार , झारखण्ड , वेस्ट बंगाल और दिल्ली।  गंगाजल के पवित्र माने जाने के फंसे सिर्फ धार्मिक कारण नहीं बल्कि साइंटिफिक कारण भी है। विभिन्न शोधों से पता चला है कि गंगा के पानी में बैक्टीरिया को मारने का अद्भुत गुण है।

लखनऊ के नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट एनबीआरआई के निदेशक डॉक्टर चंद्र शेखर नौटियाल ने जांच में पाया है कि गंगा जल में बीमारी पैदा करने वाले ई कोलाई बैक्टीरिया को मारने की क्षमता है।वैज्ञानिक कहते हैं कि गंगा के पानी में बैक्टीरिया को खाने वाले बैक्टीरियोफैज वायरस होते हैं। ये वायरस बैक्टीरिया की तादाद बढ़ते ही सक्रिय होते हैं और उन्हें नष्ट कर देते हैं।वैज्ञानिकों को कहना है कि गंगा का पानी जब हिमालय से आता है तो कई तरह की मिट्टी, खनिज और जड़ी- बूटियों का असर इस पर होता है।

इसी वजह से गंगा का पानी लंबे समय तक खराब नहीं होता और इसके औषधीय गुण बने रहते हैं।वैज्ञानिकों ने अपने शोध में ये भी पाया कि गंगा जल में वातावरण से ऑक्सीजन सोखने की अद्भुत क्षमता है।गंगा के पानी में प्रचूर मात्रा में गंधक भी होता है, इसलिए यह लंबे समय तक खराब नहीं होता और इसमें कीड़े नहीं पैदा होते। यही कारण है कि गंगा जल को हिंदू धर्म में इतना पवित्र माना गया है।